search

सृजन घोटाले में रिटायर्ड BDO की पेंशन जब्त, 4.52 करोड़ की निकासी पर नीतीश सरकार सख्त

deltin33 3 hour(s) ago views 592
  

4.52 करोड़ की निकासी पर नीतीश सरकार सख्त



जागरण संवाददाता, भागलपुर। सृजन घोटाला मामले में बिहार सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त तत्कालीन पीरपैंती बीडीओ चन्द्रशेखर झा की शत-प्रतिशत पेंशन कटौती के दंड को बरकरार रखा है। सरकार ने यह कार्रवाई बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139 के तहत की है।

झा के विरुद्ध 4 .52 करोड़ 88 हजार 246 रुपये की अवैध निकासी के आरोप हैं। गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच जारी है। चंद्रशेखर झा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति भी मिल चुकी है।

सरकारी संकल्प के अनुसार, झा के कार्यकाल में कार्यालय के विभिन्न मदों के बैंक खातों से भारी राशि की अवैध निकासी हुई। आरोप है कि उन्होंने न केवल इस अनियमितता को रोका नहीं, बल्कि नियमानुसार कार्रवाई भी नहीं की, जो लापरवाही और कदाचार का द्योतक है।

इसी मामले में सीबीआई कांड संख्या आरसी 023 2018 50015 (दिनांक 16.08.2018) दर्ज है, जिसमें विधि विभाग ने अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है। जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी राशि को षड्यंत्र और जालसाजी के तहत एक निजी समिति के खाते में हस्तांतरित किया गया।

विभागीय स्तर पर झा से स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने तर्क दिया कि नियम-43(बी) में कार्रवाई किए बिना नियम-139 के तहत सीधे दंड नहीं दिया जा सकता और आरोप चार वर्ष से अधिक पुराने हैं। हालांकि, विभागीय समीक्षा में पाया गया कि नियमावली में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।

नियम-139(ग) के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार है कि यदि कार्यरत अवधि में घोर कदाचार या पूर्ण असंतोषजनक सेवा के पर्याप्त साक्ष्य हों, तो पेंशन स्वीकृति का पुनरीक्षण किया जा सकता है, बशर्ते पेंशनर को सुनवाई का अवसर दिया गया हो, जो इस मामले में दिया गया।

इसके अतिरिक्त, झा के विरुद्ध पूर्व में भी दंड अधिरोपित हो चुका है। राज्य खाद्य निगम, रोहतास में पदस्थापन के दौरान वर्ष 2014-15 से जुड़े मामलों में उन्हें निंदन तथा कालमान वेतन में निम्नतर अवनति का दंड दिया गया था।

सरकार का मानना है कि ये सभी तथ्य मिलकर उनकी सेवा अवधि में घोर कदाचार को दर्शाते हैं। झा ने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में यह भी कहा कि अभियोजन स्वीकृति के आधार पर पेंशन रोकना उचित नहीं है, क्योंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और दोष सिद्धि नहीं हुई है।

इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि अभियोजन स्वीकृति प्रथम दृष्टया दोष के संकेत पर दी जाती है और सीबीआई की जांच रिपोर्ट, साक्ष्य तथा गवाहों के बयान इस मामले में गंभीरता स्थापित करते हैं।

अंततः, कोई नया तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत न होने के कारण पुनर्विलोकन अभ्यावेदन अस्वीकार कर दिया गया। बिहार राज्यपाल के आदेश से जारी संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि झा पर लगाए गए शत प्रतिशत पेंशन कटौती के दंड को पूर्ववत रखा जाएगा और इसका प्रकाशन बिहार राजपत्र में किया जाएगा।   
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
477175