शिमला में रात को दिल्ली और हिमाचल पुलिस के अधिकारी बहस करते हुए। जागरण
जागरण टीम, शिमला। हिमाचल प्रदेश और दिल्ली पुलिस के बीच करीब 24 घंटे से ज्यादा हाईवोल्टेज ड्रामा चला। दिल्ली में इंडिया एआइ इंपैक्ट समिट के दौरान अर्धनग्न प्रदर्शन में शामिल युवा कांग्रेस के तीन नेताओं को पकड़ने के लिए बुधवार सुबह 5:30 बजे शिमला पहुंची पुलिस टीम वीरवार सुबह 5:52 बजे निकल पाई।
हिमाचल और दिल्ली पुलिस में टकराव दिन से शुरू होकर रातभर चलता रहा। दिल्ली पुलिस टीम को दो बार कोर्ट में पेश करने के बावजूद रोका गया।
बिना सूचना कार्रवाई का आरोप
हिमाचल की शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस पर मामले में सूचित न कर गोपनीय तरीके से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। बिना स्थानीय पुलिस को औपचारिक सूचना दिए तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसकी सूचना मिलने पर शिमला पुलिस ने शहर व आसपास के इलाकों में नाके लगा दिए। आइएसबीटी शिमला, शोघी और धर्मपुर में संबंधित गाड़ियों को रोककर शिमला लाया गया।
इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और दोनों राज्यों की पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र तथा कार्रवाई की प्रक्रिया पर बहस हुई।
कोर्ट में पहली पेशी
शिमला पुलिस ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अंतरराज्यीय कार्रवाई में स्थानीय पुलिस को जानकारी देना और समन्वय आवश्यक होता है। मामला बढ़ने पर बालूगंज थाना पुलिस ने हस्तक्षेप किया और मामला कोर्ट पहुंच गया। शिमला पुलिस ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
चिड़गांव थाने में एफआईआर
पहली पेशी के बाद कोर्ट से निकलने के बाद देर शाम शिमला के चिड़गांव थाने में दिल्ली पुलिस टीम के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करवा दी गई। रिजार्ट के मालिक की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया। यहां फिर से दिल्ली पुलिस टीम को रोक लिया गया व एफआईआर का हवाला देते हुए जांच में सहयोग करने की बात कही गई। शोघी बैरियर पर देर रात तक दोनों पक्षों में बहस होती रही।
एक बजे ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद फिर रोका
देर रात मेडिकल के बाद रात करीब 1:06 बजे एसीजेएम ने आरोपितों को ट्रांजिट रिमांड पर भेजने की अनुमति दे दी। लेकिन ड्रामा यहीं खत्म नहीं हुआ। शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस को फिर से रोक लिया। सुबह 5:52 बजे सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भेजा गया।
शिमला पुलिस का आया पक्ष, क्यों रोकी थी दिल्ली पुलिस
शिमला पुलिस का कहना है कि सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि उक्त दल दिल्ली एवं हरियाणा पुलिस के कर्मियों का था, जिन्होंने दिल्ली में पंजीकृत एक मामले के संबंध में तीन व्यक्तियों का पीछा करते हुए उन्हें अभिरक्षा में लिया था। संपूर्ण विधिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने तथा संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से शिमला पुलिस ने उन्हें सक्षम स्थानीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। जहां से उन्हें 18 घंटे का ट्रांजिट रिमांड प्रदान किया गया। सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण करने एवं समुचित सत्यापन के उपरांत दिल्ली एवं हरियाणा पुलिस दल को संबंधित व्यक्तियों के साथ दिल्ली प्रस्थान की अनुमति दी गई। शिमला पुलिस प्रभावी अंतर्राज्यीय समन्वय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है, ताकि प्रत्येक कार्रवाई विधिक ढांचे के अंतर्गत तथा जन-विश्वास को बनाए रखते हुए की जा सके।
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