मृतक मंजू फाइल फोटो
संवाद सूत्र जागरण, बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमावर्ती गांवों में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे सीमावर्ती परसरामपुर गांव के मजरे गिद्धहवा में बाघ के हमले में 25 वर्षीय मंजू की मौत हो गई।
मंजू का शव गांव से मात्र 100 मीटर की दूरी पर मिला। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ जंगल में भाग गया। बाघ की दहाड़ से खेत में काम कर रहे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। उधर वन विभाग महिला का शिकार करने वाला वन्यजीव बाघ होने की पुष्टि नहीं कर रहा है।
गिद्धहवा गांव निवासी रामेश्वर ने बताया कि उनकी पत्नी मंजू दोपहर खेत में गई थी। तभी मंजू पर बाघ ने हमला कर दिया। वह उसे जबड़े में कसकर गन्ने के खेते में उठा ले गया। खेतों में किसान काम कर रहे थे। किसानों के शोर मचाने पर मंजू को छोड़कर बाघ जंगल में भाग गया। तब तक मंजू की मौत हो चुकी थी।
प्रधान शेखर पांडेय, प्रमोद, गौरी, धर्मपाल, मिलाऊ, शविचंद व राजेश आदि ने बताया कि यह गांव भारत-नेपाल सीमा पर बसा है। दोनों देशों की सीमा पर घना जंगल है। आए दिन गांव के आसपास बाघ घूमते दिखाई देता है, लेकिन वन विभाग की ओर से सुरक्षा के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
प्रधान ने बताया कि इसे लेकर चार घटनाएं हो चुकी है। यदि वन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाएगा तो आमरण अनशन शुरू कर देंगे। बताया कि पूर्व की घटना के बाद वन विभाग ने कैमरा लगा कर भूल गया था। भांभर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी योगेश कुमार ने बताया कि महिला का शिकार करने वाले जंगली जानवर के पगचिन्ह जुटाए जा रहे हैं।
किस जानवर ने महिला पर हमला किया है, इसकी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हमलावर वन्यजीव की पुष्टि हो सकेगी। ग्रामीणों को सतर्क रहने की नसीहत दी गई है।
दो माह पहले भारतीय व नेपाली महिला की गई थी जान
सीमावर्ती गांव परसरामपुर में 25 दिसंबर को जंगली जानवर के हमले में नेपाली महिला की जान चली गई थी। मृतका की पहचान नेपाल कपिलवस्तु के कृष्णानगर नगर पालिका वार्ड नंबर 10 अमौली निवासिनी 28 वर्षीय उर्मिला पत्नी प्रभु के रूप में हुई थी।
वह जंगल के रास्ते से होते हुए रिश्तेदार के घर भारतीय सीमा में आ रही थी। इसी दिन भारत-नेपाल सीमा के जंगलवर्ती गांव विशुनपुर कोड़र में शौच को गई 25 वर्षीय कमला की भी मौत हुई थी। महिलाओं को मारने वाला तेंदुआ था या बाघ, इसकी पुष्टि अभी वन विभाग नहीं कर सका था।
बाघ के होने की संभावना को लेकर वन विभाग ने थर्मल ड्रोन का सहारा लिया था, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा था। कैमरे भी लगाए गए थे।  |
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