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10 साल पहले थे 4 घर और 40 लोग, अब बढ़कर हुई 1200 की आबादी; घुसपैठ से बदल रही किशनगंज की डेमोग्राफी

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एआई तस्वीर



अमरेंद्र कांत, किशनगंज। नेपाल सीमा से सटे व बांग्लादेश सीमा से महज 22 किमी की दूरी पर स्थित किशनगंज जिला सीमांचल का यह जिला सीमांचल में काफी संवेदनशील रहा है। इस इलाके में मुस्लिम समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों का झुकाव जिस ओर होता है राजनीति भी उसी करवट मोड़ लेती है।  

करीब साढ़े तीन साल बाद गृहमंत्री अमित शाह के आगमन से एक बार फिर घुसपैठ पर चर्चा शुरू हो गयी है। नक्सल मुक्त भारत की तर्ज पर घुसपैठिए मुक्त सीमांचल बनाने की पहल को इस दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है।
10 वर्षों के अंदर डेमोग्राफी ही बदल गई

जानकारी के अनुसार किशनगंज में सूरजापुरी, शेरशाहवादी, पश्चिमा मुसलमान की संख्या अधिक है। सूरजापुरी समुदाय में हिंदू भी शामिल हैं। जबकि पूर्णिया, अररिया, कटिहार में कुल्हैया, शेखरा समुदाय के तादाद अधिक है। सीमांचल में मुस्लिम समुदाय की बढ़ रही जनसंख्या के कारण लगातार भाजपा सीमांचल के इलाकों में घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है।  

लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भी गृहमंत्री ने घुसपैठ का मामला उठाया था। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व 20 सूत्री उपाध्यक्ष सुशांत गोप कहते हैं कि जिले के कई ऐसे गांव व पंचायत हैं जहां 10 वर्षों के अंदर डेमोग्राफी ही बदल गई है।  
10 साल पहले महज 40 लोग थे

उन्होंने बताया कि इंद्रपुर में 2016 में महज चार घर थे और आबादी 40 थी जो 10 वर्षों में बढ़कर करीब 12 सौ आबादी हो गई। इसी तरह घटकपाड़ा में आबादी में सौ फीसद की वृद्धि हुई है। रायपुर, कोलया, चकदरा, भवनीगंज, घूमवस्ती, पिपला, दमदमा, पिरगाछी, कोल्हा समेत कई ऐसे गांव में जहां पिछले 10 वर्षों में आबादी 7्0 से सौ फीसद हो गई है। जबकि वर्ष 2001 से 2011 के बीच जिले की आबादी में 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।  

कहा कि जिस कदर सीमांचल में मुस्लिम आबादी बढ़ी है वह जांच का विषय है। उन्हाेंने कहा कि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या किशनगंज में 39 प्रतिशत, ठाकुरगंज में 42, बहादुरगंज में 33 व कोचाधामन विधानसभा में 28 प्रतिशत पिछले 10 सालों में बढ़ी है। वर्ष 2001 से 2011 के बीच करीब चार लाख आबादी बढ़ी है।  

दिघलबैंक प्रखंड में करीब 52 एकड़ जमीन पर अवैध कब्ज  कर लिया गया। भाजपा नेता ने बताया कि भसनायनी, तेलीभीटा, रसुलडांगी की आबादी में डेढ़ सौ प्रतिशत की वृद्धि कई बातों को इशारा कर रहा है।  

कई ऐसे गांव हैं जिसमें महिनगांव, मड़वातोली से हिदू समुदाय के लोगों का पलायन भी हुआ है। जबकि नदी किनारे बसे टेउसा, बेलुआ, कौल्हा की स्थिति भी बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जनसंख्याकीय परिवर्तन सीमांचल के इलाकों में हुआ है वह चिंता का विषय है।
25 से अधिक पकड़ाए घुसपैठिए

सीमांचल से सटे विभिन्न इलाकों में अवैध रूप से भारत में रह रहे 25 से अधिक घुसपैठिए को गत वर्ष पकड़ा गया था। इनलोगों में से कई के पास से फर्जी भारतीय आधार कार्ड बरामद किया गया। यही नहीं कई तो वर्षों से यहां रह रहे थे। जिनका पास से बैंक पासबुक, जमीन का दस्तावेज भी बरामद हो चुका है।  

सीमा पर एसएसबी व बीएसएफ की सजगता के कारण घुसपैठिए पर कार्रवाई हो रही है। लेकिन गृहमंत्री के सीमांचल में आगमन से नक्सल मुक्त भारत की तरह घुसपैठिए मुक्त सीमांचल बनाने की चर्चा होने लगी है।



  
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