एन चंद्रशेखरन, चेयरमैन टाटा संस।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा समूह की हालिया बोर्ड बैठक में भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण मतभेद उभरकर सामने आए हैं। नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक फैले इस विशाल साम्राज्य की कमान संभाल रहे एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार टाटा संस का चेयरमैन बनाए जाने पर फिलहाल कोई आम सहमति नहीं बन पाई है।
नोएल टाटा की आपत्ति और लिस्टिंग का मुद्दा
सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने बैठक के दौरान समूह की कुछ चुनिंदा कंपनियों में हो रहे घाटे पर चिंता जताई। उन्होंने चेयरमैन चंद्रशेखरन से इस बात की लिखित गारंटी मांगी कि टाटा संस को भविष्य में कभी भी शेयर बाजार में लिस्ट (List) नहीं किया जाएगा।
हालांकि, बोर्ड के कई सदस्यों ने चंद्रशेखरन का बचाव करते हुए तर्क दिया कि एक-दो कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर उनके पिछले वर्षों के समग्र योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बैठक में वोटिंग की स्थिति भी बनी, जिसे फिलहाल चंद्रशेखरन की अपील पर टाल दिया गया है।
चुनौतियों के घेरे में पिछला कार्यकाल
चंद्रशेखरन, जो फरवरी 2017 में पहली बार चेयरमैन बने थे, का वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है। पिछले एक साल में उन्हें कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ाहै:
- एअर इंडिया: अहमदाबाद हादसे के बाद कड़ी रेगुलेटरी जांच।
- TCS: प्राइसिंग को लेकर बाजार का दबाव।
- JLR (जगुआर लैंड रोवर): साइबर अटैक के कारण उत्पादन में बड़ी गिरावट।
ट्रस्ट की भूमिका और भविष्य
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो इसे किसी भी बड़े रणनीतिक फैसले में निर्णायक भूमिका प्रदान करती है। 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा की कमान संभालने के बाद यह पहली बार है जब नेतृत्व के मुद्दे पर बोर्ड के भीतर इस तरह की विस्तृत चर्चा हुई है। फिलहाल, टाटा समूह की ओर से इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।  |
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