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बांका में जदयू का प्रखंड चुनाव, चार नए और आठ पुराने अध्यक्ष, सभी निर्विरोध, जिलाध्यक्ष के ल‍िए अंदरूनी भिड़ंत

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बांका में जदयू प्रखंड अध्‍यक्ष का चुनाव हो रहा है।  



जागरण संवाददाता, बांका। जदयू का प्रखंडस्तरीय सांगठनिक चुनाव संपन्न हो गया। जिला के सभी 11 प्रखंडों और नगर क्षेत्र में अध्यक्ष पद सहित सभी पदों पर कुल एक दर्जन प्रखंड अध्यक्षों को निर्विरोध घोषित किया गया। खासकर इस चुनाव में कार्यकर्ताओं ने प्रखंड अध्यक्षों पर भरोसा जताया और वन-साइडेड चुनाव की स्थिति बनी। पार्टी नेता इसे संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के रूप में देख रहे हैं।

इस चुनाव में चार प्रखंडों में नए अध्यक्ष चुने गए हैं, जबकि शेष आठ प्रखंडों में पार्टी ने पुराने नेताओं पर भरोसा जताया है। अब सबकी नजरें एक मार्च को होने वाले जिलाध्यक्ष चुनाव पर टिकी हैं। इस बार पार्टी के भीतर अपार बहुमत और राज्य में जदयू-भाजपा की सरकार होने के कारण भीतरूनी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है।
चार नए, आठ पुराने नेताओं पर पार्टी की आस्था

इस चुनाव में अमरपुर से विमल कुमार सिंह, बांका से क्रांति कुशवाहा, बाराहाट से निखिल बहादुर सिंह और बेलहर से सूरज हांसदा नए प्रखंड अध्यक्ष चुने गए। वहीं, बौंसी से भैरव कुमार मंडल, चान्दन से दीपक कुमार भारती, धौरैया से अमरेंद्र कुमार मंडल, रजौन से अंजनी कुमार चौधरी, फुल्लीडुमर से चंदन कुमार, कटोरिया से लक्ष्मीकांत यादव, शंभूगंज से बालेश्वर प्रसाद सिंह और बांका नगर परिषद से सुषमा सिंह को पार्टी ने पुराने चेहरों के रूप में बनाए रखा।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रखंड में मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी। सभी जगह सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न हुआ, जो संगठन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। जदयू जिला के वरिष्ठ नेता इसे संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता का प्रमाण बता रहे हैं।
जिलाध्यक्ष पद को लेकर सियासी हलचल

अब सबकी निगाहें एक मार्च को होने वाले जिलाध्यक्ष चुनाव पर हैं। वर्तमान जिलाध्यक्ष अमरेंद्र प्रसाद का यह तीसरा कार्यकाल होगा। वहीं, रजौन निवासी मनोज कुमार सिंह भी जिलाध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदार हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नव निर्वाचित प्रखंड अध्यक्षों से संभावित प्रत्याशियों ने संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ नेता अपनी रणनीति में अतिपिछड़ा कार्ड का प्रयोग कर रहे हैं। अगर यह रणनीति कारगर रही, तो वर्तमान जिलाध्यक्ष अमरेंद्र को फिर से पार्टी का समर्थन मिल सकता है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि जिलाध्यक्ष चुनाव जीतने वाले नेता दो मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रस्तावित सभा में शामिल होंगे।
दलीय नेताओं की भूमिका और कार्यकर्ताओं की भागीदारी

चुनाव में विशेष ध्यान देने वाली बात यह रही कि दलीय विधायकों ने अपने समर्थकों को प्रखंड अध्यक्ष का माला पहनाकर विधान सभा चुनाव में निष्ठा का संदेश दिया। वहीं, दल में कुछ नेताओं से नजदीकी न रखने वाले समर्थकों को थोड़ी नाराजगी झेलनी पड़ी।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह चुनाव प्रक्रिया संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है। सभी जगह शांति और संयम के साथ चुनाव संपन्न होने से उम्मीद जताई जा रही है कि जिलाध्यक्ष चुनाव भी इसी तरह शांतिपूर्ण माहौल में होगा।


प्रखंडस्तरीय चुनाव में कहीं भी मतगणना या मताधिकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। सभी प्रखंडों में सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित हुए, जिससे संगठन के लिए एक सकारात्मक संदेश गया। नए और पुराने सभी प्रखंड अध्यक्ष अब पार्टी की प्राथमिकताओं और आगामी कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। आगामी जिलाध्यक्ष चुनाव में इन प्रखंड अध्यक्षों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।
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संतोष सहनी, जिला निर्वाची पर्यवेक्षक   
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