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पैनम कोल अवैध खनन मामले में झारखंड HC में हुई सुनवाई, पंजाब पावर कारपोरेशन को देना होगा जवाब

Chikheang 2026-2-24 22:56:33 views 878
  



राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में पैनम कोल माइंस में कथित अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में पैनम कोल कंपनी की ओर से जवाब दाखिल किया गया। कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि उन्होंने अपने हिस्से का कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड के हिस्से का काम लंबित है।

इस पर पंजाब विद्युत निगम की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने समय देते हुए अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई नौ अप्रैल को निर्धारित की गई। इस मामले में कोर्ट के निर्देश पर झालसा (झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण) ने स्थल निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंप दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा जिन कार्यों के पूरे होने का दावा किया गया था, उनमें से लगभग 80 प्रतिशत कार्य अभी तक नहीं किए गए हैं। अदालत ने झालसा की रिपोर्ट पर सभी पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के अधिवक्ता मनोज टंडन की कार कोर्ट के आदेश के बाद भी रिलीज नहीं करने के मामले में अब 26 फरवरी को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि रांची सिविल कोर्ट के न्यायायुक्त के समक्ष रांची पुलिस की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन की गाड़ी को छोड़ने के आदेश के खिलाफ क्रिमिनल रिवीजन दाखिल की गई है, जिस पर बुधवार को सुनवाई निर्धारित है।  

इसके बाद अदालत ने इस मामले में गुरुवार को सुनवाई निर्धारित कर दी। वकील मनोज टंडन की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि रांची सिविल कोर्ट ने उनकी कार छोड़ने का आदेश दिया था। जब वाहन लेने वे थाना पहुंचे तो उनकी कार नहीं छोड़ी गई। कहा गया कि हाई कोर्ट ने इस मामले में जांच पर रोक लगा दी है। ऐसे में वाहन नहीं छोड़ा जाएगा।  

अधिवक्ता मनोज टंडन ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है। उनकी ओर से मामले को मेंशन करते हुए कहा गया कि सिविल कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस ने वाहन नहीं छोड़ा है।  

उनकी ओर से हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है, जबकि हाई कोर्ट ने वाहन नहीं छोड़ने का कोई आदेश नहीं दिया है। बता दें कि हाई कोर्ट ने मनोज टंडन की याचिका पर सुनवाई करते हुए डोरंडा थाने में दर्ज दोनों प्राथमिकी की आगे की जांच और कार्यवाही पर रोक लगा दी है।   
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