एआई साॅफ्टवेयर की मदद से प्लान मात्र 10 मिनट में तैयार कर सकते हैं प्लान। जागरण
आशीष चौरसिया, ग्रेटर नोएडा। अभी तक कैंसर के उपचार का प्लान बनाने में डाॅक्टर की टीम को दो से तीन महीने का समय लग जाता है, लेकिन इमेज एआई साॅफ्टवेयर की मदद से प्लान मात्र 10 मिनट में तैयार कर सकते हैं। वहीं यह साॅफ्टवेयर सर्जरी प्लानिंग में भी सहयोग करता है।
इसकी मदद से सर्जरी से पहले तैयार की जाने वाली रिपोर्ट को तैयार करता है और डाॅक्टर को जिस स्थान पर समस्या होती है उसे इंगित कर देता है। यह रिपोर्ट थ्री-डी में तैयार करता है। इससे डाक्टरों की टीम को सहयोग मिलता है। इसे इजियोफाई साॅल्युशन कंपनी ने तैयार किया है।
कंपनी की सदस्य नूर फातिमा ने बताया कि उनका यह साॅफ्टवेयर कैंसर के उपचार के लिए तैयार किए जाने वाले प्लान को मात्र 10 मिनट में तैयार करता है। साथ ही जब किसी गंभीर बीमारी की सर्जरी की जानी होती है, तो इसके मदद से सर्जरी के पहले का प्लान कर लिया जाता है, जिससे मरीज के सर्जरी होने वाले क्रिटकल स्थान को इंगित करते हुए डाॅक्टर की टीम को सावधानी बरतने में मदद करता है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा इमरजेंसी या ट्रामा के आने वाले मरीजों की एक्सरे, सीटी और एमआरआई रिपोर्ट में लगने वाले समय में बचत करने में मददगार साबित हो रहा है। इसकी मदद से रोजाना अस्पतालों में होने वाले हजारों एक्सरे, सीटी और एमआरआई की रिपोर्ट बहुत कम समय में देता है। इससे मरीजों और डाॅक्टर दोनों को राहत मिलती है।
अभी तक इनकी रिपोर्ट तैयार होने में एक से दो दिन का समय लगता था, लेकिन जब से एआइ इमेज साॅफ्टवेयर का उपयोग कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, तो कुछ ही समय में रिपोर्ट मिल जा रही है। इससे इमरजेंसी वाले मरीजों को डाक्टर की टीम जल्दी देखकर उन्हें समय पर उपचार देकर जान बचाने का काम कर रही है।
इस तरह से करता है काम
यह साॅफ्टवेयर एक्सरे, सीटी और एमआरआई होने के बाद मरीज का डेटा उनके सिस्टम पर भेजा जाता है। सिस्टम पर डेटा आते ही 10 सेकंड में एक्सरे की रिपोर्ट दे देता है और सीटी व एमआरआई का डेटा सिस्टम पर आते ही दो मिनट में रिपोर्ट बना देता है। रिपोर्ट देने के साथ ही सामान्य मरीजों की सूची को अलग कर देता है और इमरजेंसी के मरीजों को हाइलाइट करके अलग कर देता है।
इमरजेंसी के मरीज जैसे ट्रामा, ब्रेन स्ट्रोक और इमरजेंसी के मरीजों की रिपोर्ट तैयार करने के साथ ही जहां पर समस्या होती है वहां पर रेड लाइन बना देता है। इससे जो भी रेडियोलाॅजिस्ट या फिजिशियन मरीज को देख रहा होता है, उसे काफी सहयोग मिल जाता है।
12 प्रदेश में हो रहा उपयोग
इस एआइ साॅफ्टवेयर इमेज एआई का उपयोग अभी तक भारत के 12 प्रदेशों में किया जा रहा हैं। इन प्रदेशों के अधिकतर सरकारी अस्पतालों में उपयोग कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इ
सके अलावा गुजरात में इस सिस्टम का उपयोग कर टीबी की स्क्रीनिंग भी की जा रही है। अभी तक इसकी मदद से गुजरात में 50 हजार लोगों की टीबी की स्क्रीनिंग की गई हैं। इसमें से तीन हजार लोगों में टीबी की पुष्टि की गई और उनका डाक्टरों की देखरेख में उपचार चल रहा है।
यह आईआईटी दिल्ली के साथ ही राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के इंक्यूबेशन सेंटर में क्लीनिकल ट्रायल के लिए इंक्यूबेट किया गया है। साफ्टवेयर को हाल ही में दिल्ली में आयोजित हुई एआई समिट में आईआईटी दिल्ली और माइक्रोसाफ्ट उन्नति की ओर से प्रदर्शित किया गया।
इसे तैयार करने वाली टीम में नूर फातिमा, मीनल गुप्ता और शीतल शामिल हैं। इस पर बिल गेट्स ने मुलाकात कर सहयोग करने की बात कही। अभी तक यह बेंगलुरु स्थित केएलई बेलगाम में किया गया है। माइक्रोसाफ्ट ने सीएसआर के तहत समर्थन दे रखा है।
बिग गेट्स ने मुलाकात कर एआई साॅफ्टवेयर में सहयोग करने की इच्छा जाहिर की है और भारत के बाहर अन्य देशों में भी इसके उपयोग पर सहयोग करने का समर्थन दिए जाने की बात कही है।
- नूर फातिमा, कंपनी सदस्य
हम इस स्टार्टअप पर गर्व महसूस करते हैं। पिछले दो वर्षों से हमारे साथ जुड़ा हुआ है। इसका समाधान स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक प्रभाव डालने की क्षमता रखता है। माइक्रोसाफ्ट उन्नति एआई प्रोगाम के हिस्से के रूप में बिल गेट्स से मिलने का मौका मिला।
- डाॅ. राहुल सिंह, सीईओ जिम्स सीएमई
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