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कम कीमत में जमीन बेचकर मुनाफा कमाने पर ED की कार्रवाई, दिल्ली-गुरुग्राम में छह ठिकानों पर की छापेमारी

LHC0088 2025-11-22 02:08:14 views 714
  



जमीन को कम कीमत पर बेचने के मामले में छह ठिकानों पर ईडी की छापेमारी
जागरण संवाददाता, नया गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ED) गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने जमीन को कम कीमत पर बेचने और दिवाला प्रक्रिया (आईबीसी) का गलत उपयोग करने के मामले में 20 नवंबर को दिल्ली और गुरुग्राम में छह जगहों पर छापेमारी की। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यह कार्रवाई उन बिचौलियों, इंन्साल्वेंसी प्रक्रिया से जुड़े लोगों, एनसीएलटी के वकीलों और खरीदार कंपनी आरडीबी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड पावर लिमिटेड (प्रमोटर विनोद दुग्गर) से जुड़े लोगों के विरुद्ध की गई।

ईडी ने यह जांच उस समय शुरू की जब दिल्ली-एनसीआर में यूनिवर्सल बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड और इसके प्रमोटरों के विरुद्ध धोखाधड़ी व प्रोजेक्ट पूरे न करने के मामले में 30 से अधिक एफआईआर दर्ज मिली।

कंपनी बाद में सीआईआरपी प्रक्रिया में गई, जिसमें एनसीएलटी ने कुछ संपत्तियां होम बायर्स को देने और बाकी को रिजाॅल्यूशन प्लान के तहत बेचने का निर्देश दिया। जांच के दौरान पता चला कि संबंधित जमीन को बहुत कम कीमत पर बेचने की कोशिश हुई।

सरकारी दरों के हिसाब से भी जमीन की कीमत प्रस्तावित बिक्री मूल्य से काफी अधिक थी, जिससे यह साफ हुआ कि कम कीमत पर बेचकर फायदा कमाने की साजिश थी। ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम की धारा 17 के तहत की गई कार्रवाई में दो बिचौलियों जिनमें एक एनसीएलटी का वकील भी शामिल हैं, इनसे करीब 50 लाख रुपये की नकदी बरामद की।

इनके मोबाइल फोन से डिजिटल डेटा भी मिला, जिसमें अवैध भुगतान से जुड़े ड्राफ्ट इनवायस और काले धन के लेन-देन के सबूत मिले। जांच में यह भी सामने आया कि बोली प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। बोली पहले से तय थी और कीमतों को कृत्रिम रूप से कम रखा गया।

एक बोली तो खुद बिचौलिये वकील ने डाली, जिससे मिलीभगत और बोली में धांधली का साफ संकेत मिला। ईडी के हाथ लगे सोशल मीडिया चैट्स में बिचौलियों और एक निजी बैंक के अधिकारी के बीच संबंधों का भी खुलासा हुआ।

यह बैंक जमीन का सुरक्षित लेनदार था और उसी अधिकारी ने बिक्री प्रक्रिया में कम मूल्यांकन को बढ़ावा दिया। बैंक ने संपत्ति की कीमत बढ़ने के बावजूद भारी कट लिया।

जांच में यह भी पाया गया कि जिन होम बायर्स का सीधे तौर पर संपत्ति के अधिकतम मूल्य से फायदा होना चाहिए था, उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा, रिजाॅल्यूशन प्रोफेशनल की लापरवाही के भी संकेत मिले हैं। मामले में ईडी की आगे की जांच अभी जारी है।

यह भी पढ़ें- बैंक अधिकारी की सूझबूझ से डिजिटल अरेस्ट का खेल नाकाम, गुरुग्राम में बुजुर्ग से ट्रांसफर कराए 64 लाख बचाए
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