इजरायल के राजदूत रुवेन अजार का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू।
जयप्रकाश रंजन। तकरीबन आठ वर्षों बाद पीएम नरेन्द्र मोदी इस हफ्ते इजरायल की यात्रा पर जा रह हैं। नई दिल्ली में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने दैनिक जागरण के सहायक संपादक जयप्रकाश रंजन से भारत व इजरायल संबंधों के साथ ही पीएम मोदी की इस यात्रा के एजेंडे पर बात की उन्होंने बताया कि रक्षा, प्रौद्योगिकी और कारोबार को लेकर अहम समझौते होंगे। पेश है इस साक्षात्कार के कुछ अहम अंश।
प्रश्न 1: पिछले एक दशक में भारत-इजरायल संबंधों में उल्लेखनीय गहराई आई है। आप इस रणनीतिक साझेदारी को अगले पांच वर्षों में किस दिशा में विकसित होता देखते हैं?
उत्तर: मैं कहूंगा कि वर्ष 2025 हमारे संबंधों के लिए एक तरह से क्रांतिकारी वर्ष रहा। पिछले 30 वर्षों में हमने भरोसे की मजबूत नींव तैयार की थी, लेकिन पिछले एक साल में दो बड़ी चीजें हुईं। पहला, इजरायल एक लंबे और कठिन युद्ध से बाहर आया, यह हमारे इतिहास का सबसे लंबा युद्ध रहा है। इसके बावजूद हम विजयी होकर निकले।
दूसरा, भारत ने भी स्पष्ट कर दिया कि वह सीमा पार आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेगा और जो भी उसे चुनौती देगा, उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। इस साझा अनुभव ने हमें फिर से यह याद दिलाया कि कठिन समय में कौन आपके साथ खड़ा रहता है। जब सब कुछ सामान्य हो तो सभी मित्र होते हैं, लेकिन असली भरोसा संकट में बनता है।
पिछले 15 महीनों में हमारे बीच नौ मंत्री स्तरीय आदान-प्रदान हुए, सात मंत्री इजरायल से भारत आए और दो भारतीय मंत्री, पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने वहां का दौरा किया। हमने द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर किए, सुरक्षा सहयोग का समझौता किया और इजरायल में भारतीय कामगारों की संख्या दोगुनी की। आने वाले पांच वर्षों में हम रक्षा, एआई और क्वांटम जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर में सहयोग को और गहराई देने पर काम कर रहे हैं।
प्रश्न 2: इसी हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल की यात्रा पर जा रहे हैं, क्या प्रमुख उपलब्धियां अपेक्षित हैं?
उत्तर: मैं बहुत खुलासा नहीं कर सकता, लेकिन यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण होगी। लेकिन कह सकता हूं इस यात्रा के दौरान हम रक्षा क्षेत्र में एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जो हमें अगले स्तर पर ले जाएगा। अब हम केवल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संवेदनशील प्रौद्योगिकियों पर भी संयुक्त रूप से काम कर सकेंगे।
एआई के क्षेत्र में भी हम सिर्फ अनुसंधान नहीं, बल्कि संयुक्त डेटा सेंटर बनाने जैसे ठोस कदम उठाने पर बात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री इजरायल की अग्रणी तकनीकी कंपनियों से मिलेंगे और यहां के भारतीय मूल के यहूदी समुदाय से भी संवाद करेंगे। यह एक ऐतिहासिक यात्रा होगी।
प्रश्न 3: दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता शुरू करने की सहमति जताई है, आगे की क्या रणनीति होगी?
उत्तर: भारत द्वारा अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ समझौते करना हमारे लिए अच्छी खबर है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मविश्वासी बन रहा है। अब हमें उम्मीद है कि हमारी बारी भी आ गई है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ही एफटीए वार्ता का पहला दौर शुरू होगा। हमारी आशा है कि वर्ष के अंत तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हमारे लिए एफटीए केवल शुल्क घटाने का विषय नहीं है।
कृषि को छोड़ दें तो इजरायल में भारत से आने वाले अधिकांश उत्पादों पर 8 फीसद से अधिक शुल्क नहीं है। लेकिन जब आप शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को पूरी तरह हटाते हैं, तो यह निजी क्षेत्र को स्पष्ट संदेश देता है कि रास्ता अब “कच्ची सड़क\“\“ से “हाईवे\“\“ में बदल गया है। भारत की ताकत बड़े पैमाने पर उत्पादन है और इजरायल नवाचार का केंद्र है।
प्रश्न : इजरायल व भारत ने अमेरिका व आइ2यू2 की शुरुआत की थी, लेकिन अब यह सक्रिय नहीं है, क्या योजना है?
उत्तर: अमेरिका इस समय अन्य कूटनीतिक प्रयासों में अत्यधिक व्यस्त है जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, दूसरा ईरान के साथ वार्ता तथा गाजा में शांति स्थापित करने के प्रयास। इसके वजह से पहले शुरू की गई कुछ पहलों पर उतना समय नहीं दिया जा सका है। फिर भी, हम इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, क्योंकि चारों देशों भारत, यूएई, अमेरिका व इजरायल के बीच कई साझा हित हैं। जैसे चारों देश इस समय आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस व बड़े डेटा सेंटर निर्माण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जिनके लिए भारी ऊर्जा उत्पादन की आवश्यकता होती है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि इन समान पहलों को किस प्रकार एक-दूसरे के पूरक बनाया जाए। हम सेवाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं, निर्माण क्षमताओं को साझा कर सकते हैं और संयुक्त निवेश कर सकते हैं। एआई, डेटा सेंटर में सहयोग आइ2यू2 देशों के लिए अत्यंत प्रासंगिक हो सकता है। इसके अतिरिक्त, अतीत में हम अंतरिक्ष अनुसंधान पर भी विचार कर चुके हैं।
खाद्य सुरक्षा और कृषि भी हमारे संबंधों के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। विशेष रूप से गुजरात में प्रस्तावित फूड कॉरिडोर को लेकर बी आइ2यू2 की योजना है। हालांकि अगली बैठक को लेकर फिलहाल निश्चित रूप से कुछ कहना कठिन है। पर्दे के पीछे आइ2यू2 को पुनर्जीवित करने के प्रयास जारी हैं और हमें उम्मीद है कि इसमें सफलता मिलेगी। |