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किश्तवाड़ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता। फोटो जागरण
बलवीर सिंह जम्वाल, किश्तवाड़। सैफुल्लाह का खात्मा सुरक्षाबलों की बहुत बड़ी कामयाबी। सैफुल्लाह और उसके साथी पिछले दो सालों से छत्रु के इलाके में सक्रिय थे और इन्होंने वहां पर काफी आंतक मचा रखा था।
सैफुल्लाह एक बहुत ही शातिर आतंकवादी था और इंटरनेट का खूब प्रयोग करता था और अपनी सारी गतिविधियां पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को देता था जब भी कोई वारदात यहां पर होती तो फौरन ही पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर उसका जिक्र हो जाता था।
सुरक्षाबलों ने सैफुल्लाह को दबोचने के लिए कई जतन किए सेना, सीआरपीएफ जम्मू कश्मीर पुलिस और स्पेशल कमांडो का इस्तेमाल हुआ हेलीकॉप्टर द्वारा भी इसे तलाशने में मदद ली गई और हर ऑपरेशन मे ड्रोन कैमरा द्वारा भी इनका पता लगाने की कोशिश की गई लेकिन यह इतने शातिर थे कि यह एक जगह पर नहीं दिखते थे हर दूसरे तीसरे दिन अपनी जगह बदलते रहते थे।
वारदात के बाद हो जाता था अंडरग्राउंड
जब भी सुरक्षाबलों को इनकी भनक लगती तो उन पर हमला कर देते और भाग जाते या चुपचाप ही भूमिगत हो जाते थे। पिछले दो सालों के दौरान सैफुल्लाह ने सुरक्षाबलों का बहुत ज्यादा नुकसान किया, जिसमें पहली बार इसने डोडा के देसा इलाके में घात लगाकर एक कैप्टन और एक जवान को बलिदान किया और उसके बाद वहां से भाग कर केशवान से होता हुआ छत्रु इलाके में आ गया उसके बाद 13 सितंबर को इसने घात लगाकर हमला किया और दो जवानों को बलिदान किया।
21 सितंबर को सुरक्षाबलों के साथ इसकी मुठभेड़ हुई लेकिन वहां से भाग निकला। 3 अक्टूबर को फिर दोबारा मुठभेड़ हुई और वहां से छुपता फिरता केशवान इलाके के आगे कुंतंवाडा में जा पहुंचा और वहां पर उसने दो बीडीजी सदस्यों को बलिदान किया और वहां से फरार हो गया जब सुरक्षाबलों ने इसको घेर लिया तो 10 नवंबर को केशवान के इलाके में दो पैरा फोर्स के जवानों को बलिदान किया, जिसमें एक जेसीओ शामिल था।
हर बार भाग निकलता था
उसके बाद 9 अप्रैल 2025 को सुरक्षाबलों ने सैफुल्लाह के तीन साथियों को देर कर दिया लेकिन सैफुल्लाह वहां से भी भागने में कामयाब हो गया और उसके बाद आदिल और दो और आतंकवादी इसके साथ शामिल हो गए 22 मेइ 2025 को इसने फिर गात लगाकर हमला किया और जिसमें एक जवान शहीद हो गया दो जुलाई को कुशाल गांव में फिर मुठभेड़ हुई और वहां से भी भाग गया।
19 सितंबर को केशवान में फिर दोबारा मुठभेड़ हुई और वहां से भागने में कामयाब रहा लेकिन उसके बाद सुरक्षा बलों ने इसे घेरने के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाई और इस दबोचने के लिए पूरा इलाका घेर लिया छात्रु के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई 19 जनवरी को ऑपरेशन त्राशी एक शुरू किया गया, लेकिन उसमें एक जवान बलिदान हो गया।
तब से ही इसे दवोचने के लिए सुरक्षा बलों ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा था और रविवार को सुरक्षा बलों को बहुत बड़ी कामयाबी हासिल हुई, जिसमें सैफुल्लाह और उसके दो साथी मारे गए सैफुल्लाह और उसके एक साथी को सुबह 11:30 बजे सुरक्षा वालों ने देर कर दिया और उसका एक साथी शाम को 6: बजे सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ गया और उसे भी डेर कर दिया गया अब पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। |
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