देहरा पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। प्रतीकात्मक फोटो
संवाद सहयोगी, देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश और पंजाब के अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जिला देहरा पुलिस ने एक सुराग मिलने के बाद मुख्य सरगना सहित अन्य महिलाओं को पकड़ा है। यह गिरोह निसंतान और जरूरतमंद दंपतियों से संपर्क कर उन्हें बच्चे बेचता था।
पुलिस ने खरीद-फरोख्त का शिकार हुआ एक बच्चा बरामद कर लिया है। उसे स्पेशल एडाप्शन एजेंसी कांगड़ा के हवाले कर दिया है। इस मामले में दो महिलाओं समेत तीन लोग पकड़े जा चुके हैं। माना जा रहा है कि इसमें और लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
ऐसे उठा गिरोह से पर्दा
गिरोह से पर्दा तब उठा जब संसारपुर टैरेस निवासी रोहित कुमार को लगा कि उसके साथ ठगी हुई है। कुछ दिन पहले मूल रूप से पुराना कांगड़ा निवासी दीपक आनंद ने फोन पर उससे संपर्क किया और 23,500 रुपये में नवजात बच्चा उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। उसकी बात पर भरोसा कर रोहित ने आनलाइन उसे 10 हजार रुपये भेज दिए लेकिन बाद में उसे लगा कि वह ठगी का शिकार हो गया है।
इसके बाद वह डाडासीबा के डीएसपी राज कुमार के पास जा पहुंचा। शिकायत मिलने के बाद 17 फरवरी को संसारपुर टैरेस थाने में मामला दर्ज किया।
जालंधर से की गिरफ्तारी
मामले की जांच थाना प्रभारी संजय को सौंपी गई। टीम ने तकनीकी आधार पर लोकेशन ट्रेस कर दीपक आनंद को जालंधर से गिरफ्तार कर लिया। उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पूछताछ के बाद पता चला कि पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला की रितु भी इस मामले में शामिल है। वह गिरोह को बच्चा उपलब्ध कराती थी। इसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया।
उससे पूछताछ के बाद अब जालंधर से भी एक महिला को पकड़ा है। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने हिमाचल में एक दंपती को बेचा बच्चा बरामद किया।
क्या कहते हैं एसपी देहरा
पुलिस अधीक्षक देहरा मयंक चौधरी ने बताया कि बच्चे को फिलहाल स्पेशल एडाप्शन एजेंसी के सुपुर्द कर दिया है। यह एजेंसी ही बच्चे की लीगल कस्टडी तय करेगी।
बच्चा गोद लेने का है कानूनी रास्ता
भारत में बच्चा गोद लेने का कानूनी तरीका केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के माध्यम से किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 है। इसके तहत बच्चा गोद लेने वाले को आनलाइन पंजीकरण करना होता है। इसके लिए इच्छुक अभिभावकों का पात्र होना, दस्तावेज अपलोड करना, होम स्टडी और अंत में अदालत के आदेश के बाद ही गोद लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। रिश्तेदार या फिर किसी पहचान वाले से भी बच्चा गोद लेने के लिए न्यायालय की अनुमति जरूरी होती है। एसपी मयंक चौधरी का कहना है कि बच्चा गोद सिर्फ कानूनी एजेंसियों के माध्यम से ही लिया जा सकता है। इसलिए लोग किसी की बातों में न आएं। यदि कभी कोई व्यक्ति ऐसा लालच दे तो पुलिस से संपर्क करें।
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