घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोग, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम। (जागरण)
संवाद सहयोगी, राजगीर। राजगीर थाना क्षेत्र के गिरियक मार्ग स्थित आयुध निर्माणी नालंदा गेट संख्या-02 से कुछ दूरी पर उजरपुर गांव के पास शनिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे स्कूली बच्चों से भरी एक बस के इंजन में अचानक आग लग गई।
बस संख्या बीआर 33पीए 3951 में लगभग 40 बच्चे और शिक्षक सवार थे। समय रहते चालक की सतर्कता और स्थानीय लोगों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस के बाएं गियर बाक्स की ओर से धुआं उठता दिखा। कुछ ही पलों में धुआं आग की लपटों में बदल गया।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चालक सुबोध कुमार ने बस को उजरपुर के रिहायशी इलाके में सड़क किनारे रोक दिया और सभी बच्चों व शिक्षकों को तुरंत नीचे उतरने के लिए कहा। शोर सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकले तो देखा कि बस के अगले हिस्से से धुएं के गुबार के साथ आग की लपटें उठ रही हैं।
घटनास्थल पर अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी और खुद राहत-बचाव कार्य में जुट गए। पास के घरों और एक सर्फ फैक्ट्री संस्थान के बोरवेल पाइप से पानी लाकर आग बुझाने का प्रयास किया गया।
साथ ही डोलोमाइट पाउडर और फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल कर आग पर काबू पाया गया। राहत कार्य में राहुल कुमार, संगम कुमार, विकास कुमार, सुरेंद्र कुमार, धनराज कुमार, अमरजीत कुमार, उपेंद्र राजवंशी, मंटू कुमार, अनिल राजवंशी और पंकज कुमार समेत कई स्थानीय युवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
मौके पर पहुंची पुलिस टीम में एसआई संजीव कुमार, सिपाही राजकुमार, प्रद्युम्न कुमार और चालक अमित कुमार शामिल थे। फायर ब्रिगेड की टीम ने भी पहुंचकर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया।
बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित निकाला गया बाहर
सभी बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बस चालक सुबोध कुमार ने बताया कि वह लखीसराय जिले के हल्सी थाना क्षेत्र स्थित मध्य विद्यालय गेरुआ के छात्रों और शिक्षकों को मुख्यमंत्री शैक्षणिक परिभ्रमण कार्यक्रम के तहत राजगीर घुमाने ला रहे थे।
रास्ते में अचानक शार्ट सर्किट से इंजन में आग लग गई। यह बस एक टूर एंड ट्रैवल एजेंसी से किराए पर ली गई थी। घटना के बाद एजेंसी की दूसरी बस मंगाकर बच्चों को सुरक्षित राजगीर परिभ्रमण के लिए भेजा गया।
सूत्रों के अनुसार संबंधित बस का रोड टैक्स और प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) फेल बताया जा रहा है। यदि यह जानकारी सही है तो परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।
स्थानीय लोगों की तत्परता और चालक की सूझबूझ से 40 से अधिक बच्चों की जान बच गई। हालांकि इस घटना ने बसों की फिटनेस और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। |