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शिमला नगर निगम का 688 करोड़ रुपये का बजट जारी, महिलाओं और युवाओं पर रहा जोर; पढ़ें बड़े एलान

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कैप्शन: शुक्रवार को शिमला में मेयर सुरेंद्र चौहान और डिप्टी मेयर उमा कौशल ने बजट पेश किया। (जागरण)



जागरण संवाददाता, शिमला। नगर निगम शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया। हर वर्ग को सुविधा देने का प्रयास दिख रहा है। महिलाओं, युवाओं और नगर निगम के कर्मचारियों को प्रमुखता दी है। मेयर ने 688.02 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो एक साल में तीन गुना से अधिक बढ़ा है।

पिछले वर्ष 188 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। शहर के 131 सार्वजनिक शौचालय पर वेंडिंग मशीनों से सैनेटरी पैड मिलेंगे। शहर में 26 स्थानों पर फूड वैन स्थापित कर महिलाओं व युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। मेयर ने घोषणा की कि नगर निगम एक मोबाइल एप शुरू करेगा। इसमें प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, चालक, टिफिन सेवा जैसे कुशल लोग स्वयं पंजीकरण कर सकेंगे।

लोग इस एप के माध्यम से उचित दर पर सेवाएं प्राप्त कर पाएंगे, इससे कुशल लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस बार निगम की आय में छह करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान है।

पिछले साल 93 करोड़ 87 लाख की आय हुई थी, इस बार बढ़कर 99 करोड़ 34 लाख तक पहुंचाने की उम्मीद है। निगम प्रशासन अपने बांड लाकर व केंद्रीय योजनाओं से विकास का नया खाका खींचने की दिशा में काम करेगा। निगम ने 200 करोड़ से फ्लैट्स बनाकर अपनी आय में बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखा।
भाजपा पार्षदों ने किया हंगामा, मेयर के पेश बजट को अवैध बताया

आय के स्रोत बढ़ाने पर निगम का ध्यान मेयर ने साफ किया कि निगम स्थायी राजस्व स्रोतों को मजबूत करने, अनुदानों पर निर्भरता घटाने और परिसंपत्तियों से आय में वृद्धि के लिए प्रयासरत रहेगा।

ऐतिहासिक और व्यावसायिक क्षेत्र एवं निगम के कार्यालय बनाने के उद्देश्य से एक बहुउद्देश्यीय माडर्न कांप्लेक्स का विकास करने की प्रस्तावना पर कार्य किया जा रहा है। पहले चरण में 140 करोड़ रुपये खर्च होंगे। डक्ट में जिन कंपनियों के तार बिछाए जाएंगे उनसे कर वसूला जाएगा। आइजीएमसी के समीप बस स्टैंड के लक्कड़ बाजार शिफ्ट होने पर यहां पर नगर निगम पेट्रोल पंप स्थापित करेगा।
बजट के शुरू होते ही सदन में हंगामा हुआ

भाजपा पार्षदों ने मेयर के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए बजट का बहिष्कार कर दिया। आरोप है कि मेयर का ढाई साल का कार्यकाल हो चुका है। इसे बढ़ाने से संबंधित एक्ट अभी कानून का रूप नहीं ले पाया है। इस प्रस्ताव पर राज्यपाल की स्वीकृति नहीं मिली है और मामला न्यायालय में है। ऐसे में मौजूदा मेयर द्वारा बजट पेश करना अवैध है।
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