तो भारत पर लगा 18 प्रतिशत टैरिफ भी हो गया बेमानी (फाइल फोटो)
राजीव कुमार, जागरण नई दिल्ली। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के वैश्विक टैरिफ को रद किए जाने के बाद दुनिया के 50 से अधिक देशों पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क का औचित्य खत्म हो सकता है।
पिछले वर्ष अप्रैल में ट्रंप प्रशासन ने विभिन्न देशों पर अलग-अलग दरों से पारस्परिक शुल्क लगाए थे। इसके बाद ब्रिटेन, जापान, यूरोपीय यूनियन, मलेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते किए गए।विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के फैसले के बाद इन समझौतों की शर्तें स्वत: अप्रभावी हो सकती हैं, क्योंकि वे उन्हीं शुल्कों पर आधारित थीं।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत के साथ मार्च में प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की तैयारी थी। अब यदि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पूर्ण रूप से लागू होता है, तो यह कटौती भी लागू नहीं होगी।
विदेश व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल से पहले वाली मूल दरें ही फिर से प्रभावी हो सकती हैं।फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशंस (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने “प्लान बी\“\“ की बात कही है। यदि वैकल्पिक कानूनी आधार नहीं अपनाया गया, तो पुराने शुल्क ढांचे पर वापसी तय है।
हालांकि स्टील और एल्युमीनियम पर लागू 50 प्रतिशत शुल्क फिलहाल जारी रह सकता है।किन वस्तुओं को राहत?ग्लोबल ट्रेड रिसर्च एनालिसिस के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, फैसले के लागू होने पर अमेरिका को निर्यात होने वाली लगभग 55 प्रतिशत वस्तुओं पर प्रस्तावित 18 प्रतिशत शुल्क नहीं लगेगा।
स्मार्टफोन, पेट्रोलियम उत्पाद और दवाएं पहले की तरह टैक्स से बाहर रह सकती हैं।सहाय ने यह भी संकेत दिया कि जिन निर्यातकों ने खरीदारों से भविष्य में शुल्क वापसी का प्रविधान तय किया था, उन्हें कुछ राशि वापस मिल सकती है।
भारत पर लगा 18% टैरिफ
गौरतलब है कि भारत के निर्यातक पिछले साल सितंबर से अमेरिका होने वाले निर्यात पर पुराने शुल्क के साथ 50 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क दे रहे थे। हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर सहमति बनने के बाद संयुक्त बयान जारी किया गया और इसके साथ भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को समाप्त कर दिया गया।
वर्तमान में भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत प्लस पिछले साल अप्रैल से पहले वाले शुल्क लग रहे हैं। अगले माह व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद यह 25 प्रतिशत शुल्क घटकर 18 प्रतिशत हो जाता।
\“प्रेसिडेंट को यह अधिकार नहीं\“, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को बताया अवैध |