सड़क निर्माण (प्रतीकात्मक चित्र)
राज्य ब्यूरो, भोपाल। जो क्षेत्र चंद दिनों बाद डूबने वाला हो, इसकी चेतावनी भी दे दी गई और वहां निर्माण कार्य करा दिया जाए तो इसे शासकीय धन की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता है। ऐसे ही कुछ मध्य प्रदेश में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने शुक्रवार को विधानसभा के पटल पर रखी अपनी लोक निर्माण द्वारा मध्य प्रदेश में सड़कों के विकास पर रिपोर्ट में पाया।
चेतावनी के बावजूद बनी सड़क, पूरा हिस्सा डूबा
उदयपुर-बामौरा-पठारी खंड में बीना नदी मार्ग तक 47.07 करोड़ रुपये की लागत से 23 किलोमीटर जिला मुख्य मार्ग बनाया गया। सिंतबर 2018 में अनुबंध हुआ। इसी माह जल संसाधन विभाग ने सागर जिले में हनौता सिंचाई परियोजना के निर्माण की स्वीकृति दी। जल संसाधन विभाग ने सड़क निर्माण कार्य आगे न बढ़ाने के लिए पत्र लिखकर चेताया लेकिन बना दी गई। अब पूरा हिस्सा डूब चुका है और 47 करोड़ रुपये व्यर्थ चले गए। ऐसे एक नहीं कई मामले हैं।
लक्ष्य से पीछे, चौड़ाई बढ़ाकर अतिरिक्त खर्च
31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार ने न्यू डेवलपमेंट बैंक से ऋण लेकर 2018-19 से 2022 की अवधि में उन्नयन के लिए 3,240 किलोमीटर का लक्ष्य रखा था। इसके विरुद्ध 2,795 में ही काम हो पाया। विभाग में स्वीकार किया कि भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी में देरी से लक्ष्य प्राप्त करने में कठिनाई हुई। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई सड़कों के लिए 3.75 मीटर की चौड़ाई पर्याप्त थी लेकिन इसे अनावश्यक रूप से बढ़ाकर 5.25 मीटर करने का प्रविधान कर दिया, जिससे राजकोष पर 84.75 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
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गुणवत्ता और आकलन में खामियां
यातायात की गलत गणना के कारण रायसेन तिगड़ा से गोपालपुर तिगड्डा रोड टूट गई। मिश्रित बिटूमेन का उपयोग करने के कारण उज्जैन, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, जबलपुर, विदिशा और नर्मदापुरम में बनाई गई सड़कों में 1.58 करोड़ का अतिरिक्त भार आया। वहीं, ब्लैक लिस्ट में डाले गए ठेकेदारों को मूल्य वृद्धि का अनियमित भुगतान में पाया गया। काली सूची में डालने के बाद भी तीन बार समय विस्तार दिया, जिससे ठेकेदार ने 26.50 करोड़ की मूल्य वृद्धि का अनियमित दावा किया।
इसे स्वीकृत कर भुगतान भी किया गया, जो ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाना माना गया। रिपोर्ट में सड़क का मास्टर प्लान न बनाना, प्रबंधन व निगरानी में कमी, ठेकेदार को जीएसटी का अतिरिक्त भुगतान, जुर्माना वसूलने से पहले की अंतिम भुगतान करना, फील्ड प्रयोगशाला की स्थापना में देरी जैसी कमियों की ओर ध्यान दिलाया है।
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233 करोड़ की सड़क 302 में बनीं
कैग ने इस बात पर भी आपत्ति उठाई कि लागत का आकलन विभाग ने ठीक से नहीं किया, जिससे परियोजना लागत बढ़ी। भोपाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग (कोलार रोड) का लागत अनुमान 233 करोड़ रुपये था, जबकि, संशोधित तकनीकी स्वीकृति 302 करोड़ स्वीकृत की गई। विद्युत पोल शिफ्टिंग, सीवर लाइन चैंबर में असमान्य भिन्नताएं देखी गईं। स्मार्ट सिटी यूटिलिटी शिफ्टिंग, संकेतक और 49 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वृद्धि, जो मूल कार्य का हिस्सा नहीं थे बिना संशोधित प्रशासनिक अनुमोदन के बाद में शामिल किया गया। |