एक्सप्रेस-वे (प्रतीकात्मक चित्र)
राज्य ब्यूरो, भोपाल। लंबे समय से भूमि अधिग्रहण और एलाइनमेंट को लेकर अटकी अटल एक्सप्रेस-वे परियोजना अब फिर पटरी पर लौटती नजर आ रही है। सरकार ने तय किया है कि निर्माण कार्य पूर्व निर्धारित डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाएगा। जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में प्रस्तुत एलाइनमेंट को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अनुमोदित कर दिया है।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के तहत किसी भी प्रकार का औद्योगिक कॉरिडोर प्रस्तावित नहीं है।
कोटा से इटावा तक 415 किमी का कॉरिडोर
‘अटल प्रगति पथ’ (चंबल एक्सप्रेस-वे) का निर्माण राज्य सरकार ने NHAI को सौंपा है। यह मार्ग राजस्थान के कोटा से शुरू होकर मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश के इटावा तक जाएगा। कुल 414.972 किमी लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,10,689.26 करोड़ रुपये बताई गई है।
पर्यावरणीय आपत्तियों के बाद बदला एलाइनमेंट
प्रारंभिक एलाइनमेंट चंबल के बीहड़ क्षेत्र के लगभग 188 किमी हिस्से और चंबल अभयारण्य के इको-सेंसिटिव जोन के 200 किमी से अधिक हिस्से से गुजर रहा था। इसके लिए लगभग 400 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता थी। जुलाई 2022 में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव पर समिति ने वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बीहड़ क्षेत्र से दूर एलाइनमेंट तय करने की सलाह दी थी।
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इसके बाद संशोधित एलाइनमेंट को प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग की सहमति मिली। राज्य सरकार की मंजूरी के पश्चात NHAI ने परियोजना की डीपीआर पूरी की।
किसानों के विरोध से टली थी प्रक्रिया
परियोजना को आठ पैकेजों में बांटा गया है। इनमें से पैकेज-3, 4, 5 और 6 श्योपुर और मुरैना जिलों से होकर गुजरते हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में इन्हें अवार्ड करने की योजना थी, लेकिन मुरैना और जौरा क्षेत्र में किसानों के विरोध के चलते प्रक्रिया रोकनी पड़ी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एलाइनमेंट में संशोधन के निर्देश दिए थे।
अब संशोधित प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के साथ ही परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का दावा है कि यह एक्सप्रेस-वे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा। |
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