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जम्मू-कश्मीर बिजली विकास विभाग की बड़ी पहल, खम्भों पर नहीं दिखेंगी बिजली की तारें, भूमिगत प्रोजेक्ट में तेजी

deltin33 5 hour(s) ago views 435
  

आंधी-बारिश में नहीं कटेगी बिजली, तकनीकी नुकसान भी कम होगा। फाइल फोटो



अंचल सिंह, जम्मू। आने वाले समय में जम्मू शहर में बिजली की तारें खम्भों पर नहीं दिखेंगी। सभी तारों को भूमिगत किया जा रहा है। इससे निर्बाध बिजली आपूर्ति तो सुनिश्चित होगी ही, शहर का सौंदर्य भी बढ़ेगा। शहर को तारों के जाल से निजात मिलेगी।

सरकार ने संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत जम्मू शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली की तारें भूमिगत करने का काम शुरू कर दिया गया है। जनवरी तक 118.32 सर्किट किलोमीटर तार डाली जा चुकी है। 11 केवी की इन तारों को भूमिगत डालने के बाद कोई भी तार खम्भे पर नहीं रहेगी। इन्हीं से लोगों के घरों को कनेक्शन दे दिए जाएंगे।

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद पुरानी तारों को खम्भों से हटा दिया जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि थोड़ी सी आंधी, बारिश के बाद प्रभावित होने वाली बिजली आपूर्ति में सुधार होगा। किसी बड़े कारण के सिवा बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं हुआ करेगी। तकनीकी नुकसान कम होगा।

वहीं तारें बिछाने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर बिजली विकास विभाग स्मार्ट मीटर भी लगा रहा है। फरवरी 2026 तक 6.5 लाख से अधिक मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकार ने हाल ही में जारी विधानसभा सत्र में यह जानकारी दी है।
जम्मू में 309.29 किलोमीटर तारें होंगी भूमिगत

बिजली मंत्रालय ने इन केबलिंग परियोजनाओं सहित बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए अारडीएसएस के तहत जेकेपीडीडी के लिए 5200 करोड़ मंजूर किए हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 309.29 सर्किट किलोमीटर लंबी 11 केवी भूमिगत तार बिछाने की मंजूरी दी गई है।

जनवरी 2026 तक 118.34 सर्किट किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है। यह परियोजना नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) द्वारा ईडी-2 अर्बन जम्मू पैकेज के तहत क्रियान्वित की जा रही है। कार्य मुख्य रूप से जम्मू दक्षिण और शहर के अन्य चिह्नित क्षेत्रों पर केंद्रित है, विशेष रूप से 11 केवी वितरण नेटवर्क में सुधार के लिए। यह प्रोजेक्ट केंद्र प्रायोजित योजना आरडीएसएस और जम्मू स्मार्ट सिटी पहल का हिस्सा है।
परियोजना के लाभ और विशेषताएं

  • क्षति में कमी: भूमिगत केबल का उद्देश्य पेड़ों के गिरने और खराब मौसम से होने वाले नुकसान को रोकना है।
  • सुरक्षा: यह परियोजना लटकते या टूटे हुए ओवरहेड तारों से जुड़े खतरों को समाप्त करती है।
  • परिचालन लागत: हालांकि शुरुआती लागत अधिक है, लेकिन लंबी अवधि में रखरखाव की लागत कम होने की उम्मीद है।
  • आधुनिकीकरण: इस परियोजना में पुराने तारों को आधुनिक, उच्च क्षमता वाले आर्मर्ड केबल्स से बदला जा रहा है, जिन्हें रेत से भरी खाइयों में बिछाया जाता है।

क्या कहते हैं अधिकारी


‘जम्मू में कई जगहों पर भूमिगत तारें डालने का काम जारी है। इसके बाद बाहरी तारों का झंझट खत्म हो जाएगा और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर पाना सरल हो जाएगा। शहर की सुंदरता भी बढ़ेगी और तारें टूटने जैसी दिक्कतें खत्म होगी। आने वाले कुछ महीनों में काम पूरा हो जाएगा।’ -गुरपाल सिंह, एमडी, जम्मू पावर डिस्ट्रिब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड
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