पूर्णिया: नई एमवीआर से जमीन रजिस्ट्री का खर्च तीन-चार गुना बढ़ेगा
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। पूर्णिया जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द ही जमीन रजिस्ट्री की नई मार्केट वैल्यू रेट (एमवीआर) लागू होने जा रही है। जिला मूल्यांकन समिति ने जिले के नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत और 2768 राजस्व ग्रामों में इलाकेवार एमवीआर रेट में संशोधन की पूरी तैयारी पूरी कर ली है, जिसे सरकार ने मंजूरी भी दे दी है। जिला अवर निबंधक डा. उमा शंकर मिश्र ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष से यह नया एमवीआर लागू होगा और इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
वर्तमान में एमवीआर और बाजार दर में काफी अंतर है। सरकारी एमवीआर रेट की तुलना में जमीन का बाजार मूल्य कई गुना अधिक है। नए रेट लागू होने के बाद जमीन रजिस्ट्री का खर्च तीन से चार गुना बढ़ जाएगा। जिले में हर साल भूमि रजिस्ट्री से करीब 200 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह होता है, और नए एमवीआर से यह राशि दो से तीन गुना बढ़ सकती है। सबसे अधिक प्रभाव शहरी क्षेत्रों, खासकर नगर निगम क्षेत्रों में देखने को मिलेगा, क्योंकि अधिकतर खरीद-बिक्री वहीं होती है।
जिला सब रजिस्ट्रार ने बताया कि वर्तमान में प्रभावी संरचना के अनुसार निर्धारित एमवीआर दरें बेहद कम हैं। उदाहरण के तौर पर, व्यावसायिक श्रेणी की डीलक्स संरचना का एमवीआर 1492 रुपये प्रति वर्गफीट है, जबकि इसका बाजार मूल्य लगभग 5,000 से 6,000 रुपये प्रति वर्गफीट है। इसी तरह, आवासीय संरचना का एमवीआर औसतन 800 से 1,000 रुपये प्रति वर्गफीट है, जबकि इसका वास्तविक बाजार मूल्य लगभग 3,000 से 5,000 रुपये प्रति वर्गफीट है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए रेट को तीन से चार गुना बढ़ाना आवश्यक था, ताकि सरकारी दर और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच संतुलन स्थापित हो सके।
जिला अवर निबंधक ने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में एमवीआर का पिछला पुनरीक्षण वर्ष 2013 में हुआ था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2016 में संशोधित हुआ था। एक दशक से अधिक समय तक पुनरीक्षण न होने के कारण राजस्व संग्रह और आधारभूत संरचना के विकास कार्यों से जुड़े भू-अर्जन कार्यों में कई चुनौतियां सामने आ रही थीं। जिले में हाल ही में एयरपोर्ट निर्माण, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे और नई औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण कार्य भी जारी हैं। नए एमवीआर रेट से इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी।
जिले में भूमि वर्गीकरण की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि को व्यावसायिक, औद्योगिक, आवासीय, मुख्य सड़क के दोनों किनारों की भूमि, सिंचित और असिंचित भूमि, बलुआही, दियारा और चंवर भूमि में विभाजित किया गया है। वहीं शहरी क्षेत्रों में भूमि को प्रधान सड़क व्यावसायिक/आवासीय, मुख्य सड़क व्यावसायिक/आवासीय, औद्योगिक, शाखा सड़क व्यावसायिक/आवासीय, अन्य सड़क (गली) आवासीय तथा कृषि और गैर आवासीय भूमि में वर्गीकृत किया गया है। इससे अब भूमि की वास्तविक उपयोगिता और बाजार मूल्य के अनुसार रजिस्ट्री दर तय की जा सकेगी।
पूर्णिया में जमीन रजिस्ट्री दर में तीन-चार गुना बढ़ोतरी, नए एमवीआर जल्द लागू
जिला प्रशासन का कहना है कि नए एमवीआर लागू होने से न केवल जमीन की वास्तविक कीमत के अनुसार रजिस्ट्री दर तय होगी, बल्कि सरकारी राजस्व संग्रह में भी पर्याप्त वृद्धि होगी। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों में आसानी होगी। प्रशासन का मानना है कि नए रेट से भूमि और संरचना के मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ेगी और जिले में व्यावसायिक और आवासीय भूमि की खरीद-बिक्री प्रक्रिया भी अधिक सुव्यवस्थित होगी।
इस बदलाव के बाद भूमि और संरचना के वास्तविक मूल्य के अनुरूप रजिस्ट्री दर निर्धारित होने से खरीदार और विक्रेता दोनों को ही फायदा होगा। साथ ही सरकारी राजस्व में वृद्धि से जिले के विकासात्मक कार्यों को भी वित्तीय सहारा मिलेगा। |