केनेडी के एक सीन में राहुल भट्ट (फोटो-इंस्टाग्राम)
प्रियंका सिंह, मुंबई। कलाकार के कानों में जब तालियों की आवाज गूंजती है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। अभिनेता राहुल भट्ट (Rahul Bhat) का आत्मविश्वास भी बढ़ा जब साल 2023 में कान फिल्म फेस्टिवल में उनकी फिल्म केनेडी के लिए लोगों ने सात मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाई थीं। हालांकि इस फिल्म को भारत में रिलीज होने में तीन साल की प्रतीक्षा करनी पड़ी। अब आज (20 फरवरी) केनेडी जी5 पर रिलीज होगी। फिल्म में शीर्षक भूमिका निभा रहे राहुल कहते हैं कि जब लोगों से कहता हूं कि इस फिल्म के लिए तालियां बजी थीं, तो कई ऐसे लोग भी हैं, जो कहते हैं कि उसमें क्या बड़ी बात है, वहां तो तालियां बजती ही रहती हैं। यह बात सच है, लेकिन उन तालियों तक पहुंचने के लिए आपकी फिल्म का भी उस अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना जरूरी है।
एक्टर ने आगे कहा, \“मैं तो कहता हूं कि आप भी तालियां बजवा लो,लेकिन उसके लिए अपनी फिल्म वहां पहुंचानी पड़ेगी, रेड कार्पेट पर चलने से पहले 25 गाड़ियां आपको लेने के लिए आनी चाहिए। खैर, मैं आलोचनाओं पर ध्यान नहीं देता हूं। मुझे इन तालियों से बहुत संतुष्टि मिलती है। कलाकार इसी सराहना का भूखा होता है। तालियां कलाकार को खुशी और आत्मविश्वास देती हैं।\“
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एक दौर ऐसा भी था, जब राहुल इस बात से नाराज थे कि उन्हें बेहतर काम क्यों नहीं मिल रहे हैं। क्या वो नाराजगी अब दूर हो गई है?
इस पर वह कहते हैं कि गुस्सा था, लेकिन व्यक्ति समय के साथ बदलता है, कई बार ठोकर खाकर सीखता है कि बदलो, नहीं तो गुस्से से कुछ नहीं होगा। काम न मिलने का मलाल होना स्वाभाविक है। खैर, बड़ी बात यह है कि अब मेरा वक्त आ रहा है। केनेडी में मेरा पात्र इतना गंभीर किस्म का है कि मुझे उससे बाहर निकलने में समय लगा। इस रोल को करने में मैंने अपना बहुत समय लगाया था, उस दौरान मैं निजी जीवन में तनाव से भी गुजर रहा था।
कोई भी रोल छोटा या बड़ा नहीं होता
शीर्षक भूमिकाएं और कई अहम रोल कर रहे राहुल हाल ही में दलदल वेब सीरीज में केवल संक्षिप्त भूमिका में दिखे थे। क्या ऐसे रोल करियर के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं? इस पर वह कहते हैं कि वह रोल मैंने निर्देशक केलिए किया है। किसी ने बहुत खूब कहा है कि रोल बड़ा या छोटा नहीं होता है, कलाकार होता है। बड़ा रोल करके भी कई बार कुछ नहीं होता है, जो कई बार एक छोटा सा रोल कर जाता है। शीर्षक रोल करने का मतलब यह नहीं है कि अगला ऑस्कर आपको ही मिलेगा। 12-13 मिनट के रोल ने भी कलाकारों को ऑस्कर जिताया है। अभिनय की यही खूबसूरती है कि किसी का बहुत लंबा रोल भी देखकर लोग कहते हैं कि हटाओ इसको और एक छोटे से रोल पर भी तालियां बज जाती हैं। मैंने इस पेशे में यह भी सीखा है कि अगर एक्टिंग बहुत अच्छी नहीं आती है, तो बोलो कम, ताकि खामियां छुपी रहें।
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