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उत्तराखंड में सौर ऊर्जा का बढ़ता दबदबा: जलविद्युत के साथ नई उड़ान

LHC0088 3 hour(s) ago views 193
  

सौर ऊर्जा उत्पादन का विस्तार राज्य को एकल स्रोत पर निर्भरता से बाहर निकाल रहा। प्रतीकात्मक



अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। ऊर्जा क्षेत्र में हाइड्रो पावर हमेशा से उत्तराखंड की ताकत रही है, लेकिन सौर ऊर्जा उत्पादन में हासिल मुकाम ने राज्य को नए पंख लगा दिए हैं। जलविद्युत शक्ति की मजबूत नींव के साथ अब सौर ऊर्जा प्रदेश का दूसरा सशक्त स्तंभ बन गई है। बढ़ती सौर क्षमता न केवल ऊर्जा उत्पादन को विस्तार दे रही है, बल्कि राज्य को एकल स्रोत पर निर्भरता से बाहर निकालकर ऊर्जा विविधीकरण को नई दिशा दे रही है।

वर्तमान में उत्तराखंड की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता 6006.63 मेगावाट है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में ऊर्जा उत्पादन की रीढ़ अब भी जलविद्युत है, जो करीब 80 प्रतिशत योगदान दे रही है, लेकिन सौर ऊर्जा लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही है। हरित ऊर्जा के अन्य सभी स्रोतों में सौर ऊर्जा पहले पायदान पर पहुंच गई है। पिछले कुछ वर्षों में रूफटाप सोलर, सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र, ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पंप और आफ-ग्रिड समाधान जैसी पहलों ने सौर उत्पादन को नई गति दी है। सौर ऊर्जा के बढ़ते दायरे से ऊर्जा क्षेत्र का जोखिम कम हुआ है और ऊर्जा विविधीकरण को मजबूती मिली है।

  • ऊर्जा स्रोत ---------------- हिस्सेदारी (प्रतिशत में)
  • बड़ी जलविद्युत परियोजना ---79.7
  • सौर ऊर्जा -------------- 14.0
  • लघु जलविद्युत परियोजना- 3.9
  • जैव ऊर्जा - 2.5
  • पवन ऊर्जा - 1.2

भौगोलिक चुनौतियों के बीच उत्तराखंड की प्रगति के बड़े मायने

देश के सौर ऊर्जा मानचित्र पर उत्तराखंड अभी शीर्ष राज्यों की श्रेणी में नहीं है, लेकिन सीमित भूभाग और भौगोलिक चुनौतियों के बीच राज्य की प्रगति काफी बड़ी मानी जा रही है। रेगिस्तानी और विस्तृत समतल भूमि वाले राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों को सौर विस्तार में बढ़त मिली है।

इसके विपरीत उत्तराखंड का अधिकांश भूभाग पर्वतीय और वनाच्छादित है। ऐसे में 1000 मेगावाट से अधिक सौर क्षमता स्थापित करना अपने में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड का माडल अन्य पर्वतीय और सीमांत राज्यों के लिए नजीर है। सौर ऊर्जा के बढ़ते निवेश से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हुआ है, तकनीकी कौशल का विकास हुआ है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। इससे राज्य की हरित विकास नीति को बड़ा आधार मिला है।
राज्य -- सौर ऊर्जा क्षमता (मेगावाट में)

  • उत्तराखंड- 1027
  • दादरा और नगर हवेली तथा दमन दीव- 135
  • झारखंड - 235
  • असम - 346
  • पश्चिम बंगाल- 320
  • गोवा -73
  • अरुणाचल प्रदेश - 15
  • मणिपुर - 17
  • मिजोरम - 34
  • त्रिपुरा - 35
  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह - 32
  • चंडीगढ़ - 78


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