MCX NSE ने सोने-चांदी फ्यूचर्स से हटाया अतिरिक्त मार्जिन, ट्रेडिंग होगी सस्ती
नई दिल्ली| मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने सोने-चांदी के फ्यूचर्स पर लगाया गया अतिरिक्त मार्जिन वापस ले लिया है। फैसला गुरुवार, 19 फरवरी से लागू होगा। यह फैसला महीने की शुरुआत में कीमती धातुओं में आए तेज और असामान्य उतार-चढ़ाव के बाद लगाए गए सख्त उपायों को हटाने के तौर पर लिया गया है।
MCX के मुताबिक, सोने के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (सभी वेरिएंट्स) पर लगाया गया 3% अतिरिक्त मार्जिन और चांदी के फ्यूचर्स (सभी वेरिएंट्स) पर लगाया गया 7% अतिरिक्त मार्जिन गुरुवार से हटा दिया जाएगा।
वहीं NSE ने भी साफ किया कि 4 फरवरी को जारी सर्कुलर के तहत लगाया गया 3% (सोना) और 7% (चांदी) अतिरिक्त मार्जिन 19 फरवरी से प्रभावी रूप से खत्म होगा।
दरअसल, महीने की शुरुआत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज क्लियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (MCXCCL) ने रिस्क मैनेजमेंट सख्त करते हुए 5 फरवरी से चांदी पर 4.5% और सोने पर 1% अतिरिक्त मार्जिन लगाया था।
इसके बाद 6 फरवरी से मार्जिन में और बढ़ोतरी की गई, जिसमें चांदी पर 2.5% और सोने पर 2% अतिरिक्त मार्जिन और जोड़ दिया गया। अब जबकि कीमती धातुओं में तेज करेक्शन आ चुका है, एक्सचेंजों ने अतिरिक्त मार्जिन हटाकर बाजार को राहत दी है। इससे ट्रेडिंग लागत कम होगी और कारोबार में फिर से तेजी आ सकती है।
यह भी पढ़ें- Gold Silver Price Hike: दो दिन गिरावट के बाद तूफानी तेजी, सोना ₹3500 तो चांदी ₹13500 महंगी; अब खरीदें या नहीं?
मार्जिन हटाने का क्या पड़ेगा असर?
1. ट्रेडिंग सस्ती होगी: अब ट्रेडर्स और निवेशकों को पहले के मुकाबले कम पैसा मार्जिन के तौर पर जमा करना होगा। यानी एक ही पूंजी में ज्यादा पोजिशन ली जा सकेगी।
2. वॉल्यूम बढ़ सकता है: मार्जिन कम होने से बाजार में ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। खासकर छोटे और रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है।
3. अस्थिरता बढ़ सकती है: कम मार्जिन का मतलब ज्यादा लीवरेज। ऐसे में कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है।
तो क्या सस्ता होगा सोना-चांदी या फिर महंगा?
मार्जिन हटने से सीधे तौर पर कीमतें तय नहीं होतीं, लेकिन आमतौर पर जब मार्जिन कम होता है तो बाजार में खरीदारी बढ़ सकती है। अगर डिमांड बढ़ी तो सोना और चांदी के भाव में मजबूती देखने को मिल सकती है।
हालांकि असली दिशा अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। कुल मिलाकर यह फैसला ट्रेडर्स के लिए राहत भरा है, क्योंकि अब सोना-चांदी में कारोबार करना पहले से सस्ता पड़ेगा। |