डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सदन में बजट भाषण पढ़ रहे हैं। साढ़े चार लाख करोड़ रुपये से अधिक आकार वाले इस बजट में नगर विकास, ग्रामीण अधोसंरचना, उद्योग, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है। प्रत्यक्ष करों में वृद्धि के संकेत कम हैं, लेकिन राजस्व सुदृढ़ीकरण के लिए नए उपाय सामने आ सकते हैं।
गुल्लक लेकर पहुंचे कांग्रेस नेता
बजट से पहले आज विधानसभा परिसर में कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन किया। गुल्लक लेकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस नेता। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार कर्ज लेकर घी पी रही है। यह जनता की तिजोरी है, जनता के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के पैसों का दुरुपयोग कर रही है और वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं कर रही। सरकार ने खजाना खाली कर दिया है।
घटती केंद्रीय हिस्सेदारी के बीच संतुलन की चुनौती
यह बजट ऐसे समय आ रहा है जब केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई है। एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाली 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के चलते प्रदेश को लगभग 7,726 करोड़ रुपये कम प्राप्त होंगे। ऐसे में आय और व्यय के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए बड़ी परीक्षा होगी। सूत्रों के अनुसार, बड़ी नई घोषणाओं के बजाय मौजूदा योजनाओं को मजबूत करने पर जोर रहेगा।
वेतन-भत्तों पर बड़ा व्यय, डीए-डीआर का प्रावधान
अनुमान है कि कुल बजट का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा वेतन, भत्तों और ब्याज भुगतान पर खर्च होगा। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनरों की महंगाई राहत में तत्काल वृद्धि की घोषणा भले न हो, पर इसके लिए वित्तीय प्रावधान रखा जा सकता है।
लाड़ली बहना समेत सामाजिक योजनाओं पर जोर
लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये दिए जा रहे हैं। इस योजना के लिए लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान संभावित है। नल-जल योजना, बिजली बिल अनुदान और विकसित भारत जी राम जी योजना के लिए भी बजट बढ़ने की उम्मीद है।
गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सीएम हेल्थ केयर योजना, आंगनबाड़ी और मध्याह्न भोजन में टेट्रा पैक दूध वितरण, तीन हजार से अधिक आंगनबाड़ी व अस्पतालों के उन्नयन तथा नए सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना जैसी घोषणाएं भी संभव हैं।
अधोसंरचना में पूंजीगत निवेश बढ़ेगा
सरकार पूंजीगत व्यय को 85 हजार करोड़ से बढ़ाकर 95 हजार करोड़ रुपये तक ले जा सकती है। सड़क, सिंचाई, बिजली और शहरी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे दीर्घकालीन विकास को गति मिले।
राजस्व बढ़ाने के लिए सख्त कदम
आय बढ़ाने के लिए बकाया कर वसूली अभियान तेज होगा। नगरीय निकायों और पंचायतों की कर प्रणाली को सुदृढ़ करने पर जोर रहेगा। आबकारी नीति में संशोधन कर शराब दुकानों की 20 प्रतिशत वृद्धि के साथ छोटे समूहों में नीलामी की तैयारी है। खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और डिजिटल नीलामी से राजस्व वृद्धि की रणनीति अपनाई जाएगी।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी
वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ आयोजन के लिए चार हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया जा सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना होगा। कृष्ण पाथेय योजना के लिए भी बजट में राशि रखे जाने की संभावना है।
ई-विधान की ओर बढ़ता कदम
विधानसभा सचिवालय ई-विधान परियोजना के तहत विधायकों को टैबलेट उपलब्ध कराएगा, जिनमें बजट दस्तावेज अपलोड रहेंगे। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी टैबलेट से ही बजट भाषण पढ़ेंगे। बजट को अंतिम मंजूरी देने के लिए सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होगी।
कुल मिलाकर, यह बजट सीमित संसाधनों के बीच विकास, सामाजिक सुरक्षा और राजस्व संतुलन साधने की कोशिश का अहम दस्तावेज साबित हो सकता है। |