राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने मंगलवार को विद्या भारती के भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, सरस्वती कुंज, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है।
घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं दिया जाए। कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए।
जहां तीन से कम बच्चे पैदा होते हैं, वह समाज धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। वहीं, माधव सभागार में आयोजित दूसरे कार्यक्रम कार्यकर्ता कुटुंब मिलन में कहा कि मंदिर, कुआं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुला होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दो दिनी प्रवास पर लखनऊ पहुंचे डा. मोहन भागवत ने पहले दिन दो कार्यक्रमों सामाजिक सद्भाव और कार्यकर्ता कुटुंब मिलन में संबोधन दिया। सामाजिक सद्भाव विषय पर संवाद में कहा कि लालच देकर व जबरन किए जा रहे मतांतरण पर रोक लगाना होगा।
घर वापसी का कार्य तेज करने की आवश्यकता है। जो हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान रखना चाहिए। हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं। जो विरोधी हैं, उन्हें मिटाना है, ऐसा हम नहीं मानते। एक ही सत्य सर्वत्र है। इस दर्शन को समझ कर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा।
सरसंघचालक ने कहा कि हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह माताएं तय करती थीं। मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती हैं। महिलाएं अबला नहीं बल्कि असुर मर्दिनी हैं। उन्हें आत्म संरक्षण का प्रशिक्षण होना चाहिए।
पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से है, हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है। उनका सौंदर्य नहीं, वात्सल्य देखा जाता है। यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी हैं।
जातियां, झगड़े का कारण नहीं बननी चाहिए। भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध षड्यंत्र कर रहे हैं। उनसे सावधान रहना होगा।
कार्यक्रम में सिख, बौद्ध, जैन समाज के साथ ही रामकृष्ण मिशन, इस्कान, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट आफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम, ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
वहीं, दूसरे कार्यक्रम कार्यकर्ता कुटुंब मिलन में भागवत ने कहा कि बच्चों को बताएं कि ज्यादा कमाना व उपभोग करना करियर नहीं है। उन्हें शिक्षा दें कि दूसरों के लिए जीना सीखें। अमीर होकर दान करें। देश उनके लिए पहले हो। बच्चों को मातृ भाषा के प्रति प्रेरित करें।
कहा कि संघ पूरे हिंदू समाज को एक मानता है। पारिवारिक स्तर पर मेलजोल बढ़ाना चाहिए। संघ के कुटुंब में कोई जात-पात नहीं है। सरसंघचालक ने कहा कि बस्ती और शाखा के स्तर पर 100 से 70 की संख्या में कुटुंब मिलन होना चाहिए।
कहा कि हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों से संपर्क में आकर आत्मीय संबंध आना चाहिए जो संघ से दूर हैं। बच्चों को स्क्रीन टाइम का अनुशासन भी सिखाएं। |