राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में पुल गिरने की जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश के बाद भी सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताई।
अदालत ने ग्रामीण विकास विभाग को सचिव को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से 10 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। कोर्ट ने यह राशि प्रार्थी को देने का निर्देश दिया है, जिसका वहन राज्य के खजाने से नहीं किया जाएगा।
इस संबंध में प्रार्थी पंकज कुमार यादव की जनहित याचिका दाखिल की है। जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। लेकिन कई तिथि के बाद भी सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया जा रहा है, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि 27 नवंबर 2025 और नौ जनवरी 2026 को भी जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया। नौ जनवरी को राज्य सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि जल्द ही जवाब दाखिल कर दिया जाएगा, लेकिन वह भी पूरा नहीं हुआ।
कोर्ट ने आखिरी मौका देते हुए 24 फरवरी तक जवाब देने का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि ग्रामीण विकास सचिव की ओर से इस बार भी जवाब दाखिल नहीं दिया गया तो वे व्यक्तिगत रूप से 10 हजार रुपये का जुर्माना याचिकाकर्ता को देंगे।
अदालत ने प्रार्थी को प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए 11 मार्च तक का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। |