search

उत्तराखंड के राज्य विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण अब अनिवार्य, इस बात पर दिया जा रहा जोर

deltin33 6 hour(s) ago views 474
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



अशोक केडियाल, देहरादून। प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण को अनिवार्य कर दिया गया है। अब सभी विश्वविद्यालयों को विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों के साथ एमओयू करना होगा, ताकि छात्रों को उनके विषय से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। इस व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण की मासिक प्रगति रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराना भी अनिवार्य किया गया है।

उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, यह पहल नई शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। सरकार का मानना है कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक अनुभव से छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और वे उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों में भी आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत ने कहा कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों को उद्योगों से समन्वय स्थापित कर छात्रों को कौशल विकास से जोड़ना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक प्रशिक्षण की प्रगति पर शासन स्तर से नियमित निगरानी की जाएगी और इसमें लापरवाही बरतने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।

यह भी पढ़ें- Uttarakhand Weather: पहाड़ों में पाला, मैदान में कोहरे के आसार; पारे में गिरावट से बढ़ेगा सर्दी का सितम

राज्य विवि से संबद्ध 119 महाविद्यालय
प्रदेश के 12 राजकीय विश्वविद्यालयों से 119 राजकीय महाविद्यालय संबद्ध हैं। इनमें सर्वाधिक 59 महाविद्यालय श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय तथा 54 महाविद्यालय कुमाऊं विश्वविद्यालय हल्द्वानी से जुड़े हैं। इन महाविद्यालयों में 80 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों से आती है। ऐसे में इन छात्रों को कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चार मैदानी जिलों में केंद्रित उद्योग
प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत उद्योग हरिद्वार, देहरादून, उधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे मैदानी जिलों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए उद्योगों से एमओयू करना अपेक्षाकृत आसान होगा। हालांकि, चमोली और उत्तरकाशी जैसे दूरस्थ पर्वतीय जिलों में स्थित संस्थानों के लिए उद्योगों से जुड़ाव एक चुनौती बना हुआ है। ऐसे क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने पर सरकार विचार करना होगा



‘औद्योगिक प्रशिक्षण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग एक डिजिटल पोर्टल विकसित कर रहा है। इस पोर्टल पर विश्वविद्यालयों को एमओयू, प्रशिक्षण, उपस्थिति और प्रगति से संबंधित जानकारी अपलोड करनी होगी। इससे शासन स्तर पर निगरानी आसान होगी और समय-समय पर मूल्यांकन भी किया जा सकेगा।’
-

-डा.धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
472399