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आपकी ये एक आदत कम कर सकती है अल्जाइमर का खतरा, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

LHC0088 3 hour(s) ago views 275
  

बस आज ही डाल लें ये 3 छोटी आदतें, अल्जाइमर भी रहेगा कोसों दूर (Image Credit - Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि रोज किताब पढ़ना, कुछ नया सीखना या लिखने की आदत आपके दिमाग को लंबे समय तक हेल्दी बनाए रख सकती है? हाल ही में सामने आई एक नई स्टडी ने इस सवाल का जवाब दिया है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की मेडिकल पत्रिका न्यूरोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार, जो लोग हमेशा अपने दिमाग को एक्टिव रखने के लिए कई तरह की एक्टिविटी करते हैं, उनमें अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा कम होता है ।

वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह शोध सीधे तौर पर यह साबित नहीं करता कि पढ़ाई-लिखाई से अल्जाइमर पूरी तरह रुक सकता है, लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि दिमाग को एक्टिव रखने से अल्जाइमर का खतरा कम हो सकता है।
पढ़ने-लिखने की आदत दिमाग के लिए फायदेमंद

वैज्ञानिकों ने 80 साल की उम्र वाले करीब 1,939 लोगों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जो लोग लाइब्रेरी जाते हैं, नई भाषाएं सीखते हैं या नियमित रूप से पहेलियां सुलझाते हैं, उनका दिमाग दूसरों के मुकाबले 5 से 7 साल ज्यादा जवान रहता है। इस अध्ययन में शामिल लोगों का वैज्ञानिकों ने तीन स्टेजेस (शुरुआती उम्र, मिडिल एज और बुढ़ापे) में पढ़ने, लिखने और नई चीजों को सीखने की क्षमता के आधार सर्वे किया।

वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की जिसमें उन्होंने दो तरह के लोगों की तुलना की। 10% लोग वो जो अपने दिमाग का खूब इस्तेमाल करते थे और दूसरे 10% लोग वो जो कम एक्टिव रहते थे। इसमें पता चला कि दिमागी रूप से कम एक्टिव रहने वाले लोगों में 34% को अल्जाइमर हुआ और पढ़ने-लिखने वाले लोगों में इसका असर 21% तक ही रहा। जो लोग अपनी पूरी उम्र दिमाग का खूब इस्तेमाल करते हैं, उनमें अल्जाइमर का खतरा 38% और भूलने की बीमारी का खतरा लगभग 36% तक कम हो जाता है।

अल्जाइमर: ज्यादा एक्टिव लोगों में यह करीब 6 साल देरी से (94 साल की उम्र में) शुरू हुआ।   

  

(Image Credit - Jagran)

याददाश्त की कमी: एक्टिव लोगों को इसका सामना 7 साल बाद (85 साल की उम्र में) करना पड़ा।

स्टडी के एक्सपर्ट जम्मिट का मानना है कि अगर आप पूरी उम्र कुछ नया सीखते रहते हैं या दिमाग को चुनौती देने वाले काम करते हैं, तो आपका दिमाग बुढ़ापे में भी जवान रहता है। वहीं, पढ़ाई-लिखाई और लाइब्रेरी जैसी चीजों पर ध्यान देना डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

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Source:

(American Academy of Neurology)
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