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गाजियाबाद में शुद्ध हवा के इंतजार में कट गए 165 दिन, सांसों पर संकट बरकरार

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गाजियाबाद के लोग प्रदूषण से जूझ रहे हैं। फोटो सौजन्य- जागरण आर्काइव



राहुल कुमार, साहिबाबाद। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से लोग एनसीआर में इस उम्मीद से रहने के लिए आते हैं कि यहां बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इसमें कोई दो राय भी नहीं है। घर से बाहर निकलते तक की जरूरत नहीं होती और उन्हें तमाम सुविधाएं मिल भी जाती हैं।

चाहें वह अच्छे कपड़े हों, खाना हो या फिर अन्य कोई भी रोजमर्रा के जरूरत का सामान, लेकिन स्वच्छ हवा की उम्मीद दिन प्रतिदिन खत्म होती जा रही है। शुद्ध यहां के इंतजाम में यहां के लोगों के 165 दिन कट गए, लेकिन अभी भी सांसों पर प्रदूषण का संकट छाया हुआ है।

गाजियाबाद में आबादी करीब 50 लाख है। अंतिम बार बीते वर्ष दो सितंबर को साफ हवा मिली थी। एक्यूआई 48 रहा था। इसके बाद लोगों का हर दिन कभी खराब तो कभी बेहद खराब हवा में कट रहा है। यहां तक की संतोषजनक हवा तक नहीं मिल पा रही है। दो सितंबर के बाद से 10 दिन ही संतोषजनक रही।

बाकी दिन हवा गंभीर, बेहद खराब, खराब व मध्यम श्रेणी में रही है। लोगों को साफ हवा मिलनी तो दूर की बात है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कागजों में योजनाएं बनती रहीं। सड़कों पर उड़ती धूल इस बात की गवाही देती रही की पानी का छिड़काव करने के नाम पर भी खानापूरी हो रही है।
16 दिन गंभीर हवा में रहना पड़ा

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के अनुसार 400 से अधिक एक्यूआई होने पर हवा स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक जहरीली रहती है। जिले की हवा 16 दिन गंभीर श्रेणी में रही है। यह जहरीली हवा बीमार व्यक्ति के साथ ही स्वस्थ व्यक्ति को भी बड़ा नुकसान पहुंचाती है। अस्पतालों में सांस व दमे के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगती है।
जिले में सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र

मोहननगर, राजनगर एक्सटेंशन, लोनी, भोपुरा-दिल्ली बार्डर, सिद्धार्थ विहार, कनावनी पुस्ता रोड, विजय नगर एंड साउथ साइड जीडी रोड व लालकुआं को सबसे अधिक प्रदूषित इलाकों में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में भी प्रदूषण रोकथाम के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए इन बिंदुओं पर काम होने की जरूरत

निर्माण कार्य में धूल उड़ने पर रोक लगे।
15 साल पुराने वाहनों पर रोक लगे।
सीएनजी और ई-वाहनों की संख्या बढ़े।
जाम की समस्या को खत्म करना।
अवैध फैक्ट्रियों को बंद करना होगा।
सड़कों पर पानी का छिड़काव हो।
बीते 165 दिन में कितने दिन किस श्रेणी में रही हवा

  • गंभीर 16
  • बेहद खराब 67
  • खराब 38
  • मध्यम 34
  • संतोषजनक 10


प्रदूषण बोर्ड की जिम्मेदारी निगरानी करने की है। समय-समय पर कार्रवाई भी करते हैं। प्रदूषण रोकथाम की जिम्मेदारी 20 से अधिक विभागों की है। सभी को अपना कार्य करना चाहिए।


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-अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी
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