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जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण बदलाव पर विधायकों ने जताई गहरी चिंता, अलग बजट की मांग

deltin33 1 hour(s) ago views 994
  

पर्यावरण बदलाव पर विधायकों ने जताई गहरी चिंता। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, जम्मू। देश के अन्य भागों की तरह ही जम्मू-कश्मीर में हो रहे पर्यावरण बदलाव से सदन में कुछ विधायक चिंतित दिखे और उन्होंने सरकार से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और इसके लिए अलग सेे बजट का प्रविधान करने को भी कहा।

जल शक्ति विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान माक्र्सवादी विधायक मोहम्मद युसूफ तारीगामी ने पर्यावरण बदलाव का मुद्दा गंभीरता से उठाते हुए कहा कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट में पर्यावरण बदलाव पर कुछ भी जिक्र नहीं था।

यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।उन्होंने कहा कि हमारा विकास हमारे पर्यावरण की स्थिति पर निर्भर करता है। बादल फटना, बाढ़ आना, अधिक बारिश हो, भूस्खलन होना पर्यावरण का प्रश्न ही नहीं है बल्कि इससे विकास भी बाधित होता है।उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ी चिंता पर्यावरण बदलाव है।

हमें भी इसका संज्ञान लेना चाहिए। इसका बुरा प्रभाव न हो, इस पर कदम उठाने होंगे। हमारे देश के कई प्रदेशों में पर्यावरण पर अलग बजट है।मैंने भी मुख्यमंत्री को इस पर अलग से एक नोट दिया है जिसमें जम्मू-कश्मीर को भी पर्यावरण पर अलग बजट रखने को कहा है।

बजट में इस पर कोई भी जिक्र न होना, चिंतातनक है। पर्यावरण बदलाव के कारण हर वर्ष होने वाले नुकसान पर करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। आपदा को रोकने के लिए पर्यावरण में हो रहे बदलाव को देखना होगा।

जम्मू दक्षिण के विधायक नरेंद्र सिंह ने कहा कि पर्यावरण को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। पर्यावरण में लगातार बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज से बीस वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर में बादल नहीं फटते थे। तापमान लगातार बढ़ रहा है।

अगर आने वाले दिनों में दो डिग्री तापमान और बढ़ा तो यह समस्या और बढ़ेगी।जम्मू-कश्मीर में हर जगह बादल फटने की घटनाएं होंगी।हिमालयन राज्यों की जिम्मेदारी बनती है कि हम पर्यावरण को बचा कर रखें।लालच में हम पर्यावरण को तबाह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वन विभाग हर वर्ष दो से पांच करोड़ पौधे लगाने की बात करता है लेकिन इसमें से कितने बचते हैं। इस पर भी जानकारी देनी चाहिए। क्या यह पौधे कागजों में लग रहे हैं। अगर हम पर्यावरण से खिलवाड़ करेंगे तो सभी का बचना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें केरल की तरह ही औषधीय पौधों पर ध्यान देना चाहिए।
बेहतर योजनाएं जरूरी

चर्चा में भाग लेते हुए नगरोटा से विधायक देवयानी राणा ने कहा कि सरकार को पेस (एलोकेट, कोआर्डिनेट, एग्जीक्यूट) की तर्ज पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं फेल हो रही हैं। स्रोतों का सही प्रबंधन नहीं हो रहा।उन्होंने कहा कि अधिकारी काम करना चाहते हैं।

बाढ़ की स्थिति में भी सभी अधिकारियों ने चौबीस घंटे काम किया लेकिन इससे निपटने के लिए उन्हें औजार हमें देने हैं। उन्होंने कहा कि हमें बेहतर योजना बनानी होगी।बारिशों के दौरान नालों का नुकसान हुआ है। कई क्रेट टूटे हैं। उसकी मरम्मत करवानी हमारी जिम्मेदारी है।

बजट अलाट करते समय हमें सभी चुनौतियों को देखना होगा।विभागों में बेहतर समन्वय होना चाहिए।उन्होंने मथवार का जिक्र करते हुए कहा कि इस गांव में इंटरनेट के सिग्नल ही नहीं है। गांव की एक लड़की सावितू और उसकी सहेलियों को आनलाइन फार्म भरने के लिए कई किलोमीटर चलना पड़ता है ताकि इंटरनेट का सिग्नल आए।
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