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रंगदारी का मामला। एआई द्वारा जनरेटेड
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। फरीदाबाद में उद्योगपति से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में क्राइम ब्रांच की जांच पकड़े गए तीन गुर्गों पर आकर रुक गई है।
दरअसल, पकड़े गए गुर्गों ने क्राइम ब्रांच को बताया है कि उन्हें वॉट्सएप कॉल के जरिये निर्देश मिल रहे थे। काल होने के बाद नंबर भी अपने आप डिलीट हो जाता था। रोहित गोदारा गैंग से जुड़ने की बात कहकर उनका ब्रेनवाश किया गया था।
उन्हें कहा गया था कि इस गैंग के साथ जुड़कर वे अपना बड़ा नाम बना सकते हैं। इसी लालच में वे काम करने के लिए राजी हो गए थे। निर्देश कौन दे रहा था, इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
क्राइम ब्रांच ने तीनों गुर्गों के मोबाइल डायटेक लैब में भेजे हैं। क्राइम ब्रांच को उम्मीद है कि लैब मोबाइलों का पुराना डाटा रिकवर करेगी, जिससे पता चल सकेगा कि गुर्गों को काल पर निर्देश कौन दे रहा था।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए बठिंडा निवासी मोनू गुर्जर, हनी और कपिल को सात दिन का रिमांड पूरा होने पर क्राइम ब्रांच ने अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया है।
काम के लिए मिले थे 10 हजार रुपये
फरीदाबाद में उद्योगपति और दिल्ली में कारोबारी के घर चिट्ठी और एके 47 की गोलियां डालने के लिए गुर्गों को वाट्स-एप काल के जरिये ही निर्देश मिले थे। कॉल के जरिये उन्हें गोलियां और चिट्ठी बठिंडा में ही एक जगह से उठाने के लिए कहा गया था। वहां एक बाक्स में चिट्ठी और गोलियां मिली थीं।
उन्हें किसने रखा, यह भी गुर्गों को नहीं मालूम। साथ ही इस काम के लिए बाक्स में ही उन्हें 10 हजार रुपये ही मिले थे, वे भी पंजाब से दिल्ली-फरीदाबाद आने, ठहरने और खाने पीने में खर्च हो गए। गुर्गों को कुछ दिन दिल्ली या फरीदाबाद के आस-पास ही ठहरकर अगले निर्देश का इंतजार करने के लिए कहा गया था।
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क्राइम ब्रांच का कहना है कि उन्हें इंतजार करने के लिए इसलिए कहा गया था कि जल्द ही कारोबारी और उद्योगपति के घर के बाहर फायरिंग का निर्देश मिलेगा।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अब दिल्ली पुलिस भी आरोपितों काे रिमांड पर ले सकती है। |
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