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क्लर्क भर्ती परीक्षा के फर्जी अभ्यर्थी को नहीं पकड़ पाई चंडीगढ़ पुलिस, सबूतों के अभाव में पास कैंडिडेट Court से बरी

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चंडीगढ़ जिला अदालत से हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने दीपक को बड़ी राहत।



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की क्लर्क भर्ती की परीक्षा में धांधली के एक केस में पुलिस को बड़ा झटका लगा है। पुलिस ने जिस आरोपित को धोखे से परीक्षा पास करने के आरोप में गिरफ्तार किया था, वह सबूतों के अभाव में रिहा हो गया। जिला अदालत ने इस मामले में हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने दीपक को बरी कर दिया।

दीपक के खिलाफ छह साल पहले सेक्टर-19 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। पुलिस को शिकायत मिली थी कि 2016 में स्टाफ सिलेक्शन कमीशन का कंबाइंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन एग्जाम हुआ था। इसमें दीपक नाम के युवक को एलडीसी की पोस्ट पर सिलेक्शन हुआ था, लेकिन उसकी हैंडराइटिंग और साइन आपस में मैच नहीं हो रहे थे।

इसकी जब सीएफएसएल जांच करवाई तो पता चला कि यह दोनों अलग-अलग लोगों के थे। यानी दीपक ने धोखे से यह परीक्षा पास की थी। इस आधार पर पुलिस ने दीपक को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ आइपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत एफआइआर दर्ज कर ली थी।

आरोपित के वकील ने अदालत में कहा कि पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाया था। यह परीक्षा नौ जुलाई 2017 को हुई थी और तब पुलिस ने किसी भी शख्स को दूसरे की जगह परीक्षा देते नहीं पकड़ा था। इसके अलावा इस केस में दीपक के अलावा कोई और शख्स भी गिरफ्तार नहीं हुआ। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि उसकी जगह किसी और ने परीक्षा दी थी। पुलिस ने परीक्षा की कोई सीसीटीवी फुटेज भी नहीं पेश की। ऐसे में दीपक के खिलाफ आरोपित साबित नहीं होते। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए दीपक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
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