ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। जागरण
जागरण संवाददाता, पलवल। हथीन खंड के छांयसा गांव में हेपेटाइटिस का प्रकोप जारी है। रविवार को भी हेपेटाइटिस बी के तीन नए मामले सामने आए हैं। बीते चार दिनों में हुई जांच में गांव में हेपेटाइटिस बी और सी के 18 मरीज मिले हैं। साथ ही, अभी तक गांव में चार मौत हेपेटाइटिस बी और सी से हुई हैं जबकि तीन मौतें पीलिया से बताई जा रही हैं, जो हेपेटाइटिस का प्रमुख लक्षण होता है। बीमारी के बढ़ते प्रकोप से गांव में दहशत का माहौल है। जांच के दौरान एक एड्स का भी मरीज मिला है।
लगातार हुई मौतों से ग्रामीण में डर
संक्रमण से बीमारी का डर बढ़ने के साथ ही बड़ी संख्या में लोग जांच व टीकाकरण करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को भी गांव में स्क्रीनिंग और टीकाकरण अभियान चलाया। घरों में पानी के दूषित मिलने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अवैध कनेक्शन काट दिए।
बता दें कि छांयसा गांव में शुरुआत में हुई मौतों को ग्रामीणों ने सामान्य माना, लेकिन लगातार हुई मौतों से ग्रामीण भयभीत हो गए। इसकी सूचना जिला स्वास्थ्य विभाग को दी गई तो गांव में हेपेटाइटिस संक्रमित मिलने लगे। अभी तक हेपेटाइटिस के 18 एक्टिव मामले गांव में मिल चुके हैं। इसी बीच जांच के दौरान एक युवक एड्स से पीड़ित पाया गया।
चलाया गया टीकाकरण अभियान
रविवार को गांव में हेपेटाइटिस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण अभियान के तहत 80 लोगों को टीका लगाया गया। वहीं, शनिवार को 70 लोगों को हेपेटाइटिस का टीका लगाया था। एचसीवी के 86 टेस्ट में एक संक्रमित मिला है। गांव में लगाई गई विशेष ओपीडी में 193 लोगों की जांच की गई। स्वास्थ्य टीम की जांच के दायरे में ज्यादातर हेपेटाइटिस संक्रमित मिले मरीजों से संपर्क में रहने वाले लोग हैं।
असुरक्षित यौन संक्रमण के चलते संक्रमण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हेपेटाइटिस 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग में अधिक पाया गया है। जांच में सामने आया है कि गांव के युवक दूसरे प्रदेशों में भारी वाहनों पर चालक का कार्य करते हैं। वहीं से यह असुरक्षित यौन संक्रमण के चलते संक्रमित हुए। कुछ मामलों में नशे के लिए संक्रमित सूई का उपयोग करना भी पाया गया है। वहीं झोलछापों द्वारा स्टेराइड देने से भी यह फैल सकता है। अभी एक्टिव मामलों में सभी की हालत सामान्य है, इनमें लक्षण भी नहीं दिख रहे हैं। हालांकि इन मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही टीम भी लगातार इनकी निगरानी कर रही हैं।
पेयजल में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया
जांच में गांव के पानी में क्लोरीन की कमी पाई गई थी। जांच में रिपोर्ट में छह घरों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया था। रविवार को जन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दूषित पानी के लिए जिम्मेदार अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई की।
गांव में करीब 24 अवैध कनेक्शन काटे गए, ताकी लीकेज से पानी दूषित न हो। साथ ही पानी में क्लोरीन मिलकर आपूर्ति की जा रही है। संक्रमण कम करने को उठाए कदम पीएचसी छांयसा के इंचार्ज मेडिकल अफसर डाॅ. देवेंद्र जाखड़ ने बताया कि गांव में तीन नए संक्रमित मिले हैं।
अब एक्टिव मामलों की संख्या 18 हो चुकी है। गांव में हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए टीकाकरण भी किया जा रहा है। टीका संक्रमितों के स्वजन व करीबियों के संपर्क के लोगों को लगाया जा रहा है।
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