पढ़ाई में जाति के आधार पर भेदभाव क्यों?
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शिक्षा के लिए सरकारी सुविधाओं में जातिगत भेदभाव का मुद्दा उठाकर मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की एक बेटी चर्चा में आ गई है। खंडवा जिले में एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने घोषणा की कि एससी-एसटी छात्र-छात्राओं के लिए सरकार की ओर से बस, छात्रावास, आवास भत्ता, नीट और पीएससी के लिए नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी।
इस घोषणा के बाद छात्रा ने मंत्री से पूछा कि पढ़ाई में जातिगत भेदभाव क्यों किया जा रहा है? इस बेटी के सवाल पर मंत्री ही नहीं, कार्यक्रम में मौजूद सारे लोग निरुत्तर हो गए। मंत्री इतना ही बोले कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।
छात्रा ने शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री विजय शाह के सामने यह मुद्दा उठाया और अगले दिन शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खंडवा दौरे के दौरान उनसे मिलकर वही सवाल किया।
छात्रा ने मुख्यमंत्री से कहा कि शिक्षा के लिए जातिगत नहीं, आर्थिक आधार पर सरकारी सुविधाएं दी जानी चाहिए, क्योंकि हर वर्ग में लोग पिछड़े हैं। जाति आधार पर सुविधाएं देने से जिन्हें जरूरत नहीं, वे भी लाभ पा जाते हैं और जिन्हें जरूरत है, वे वंचित रहने से पिछड़ जाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया।
बोली- मेरा सवाल जायज, अधिकारों में समानता हो
छात्रा ने कहा कि मेरा सवाल पूरी तरह से जायज है, क्योंकि कॉलेज में एससी-एसटी वर्ग की छात्राओं को किताबें और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि ओबीसी और सामान्य वर्ग की छात्राएं इन सुविधाओं से वंचित हैं।
उसने कहा कि मेरे जैसी बहुत सारी छात्राएं ऐसी हैं, जिनके पिता किताबें खरीदकर देने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। ऐसे में, हमारी पढ़ाई प्रभावित होगी। यदि जाति आधारित सुविधाओं वाली व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो समाज से कभी पिछड़ापन खत्म नहीं होगा। |