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भारतीय मूल के डॉक्टर्स का दबदबा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टाइम मैगजीन ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2026 की एक लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में 100 सबसे प्रभावशाली लोगों के नाम दिए गए हैं। इसमें उन डॉक्टर्स के नाम हैं जिन्होंने बच्चे की आनुवंशिक बीमारी के इलाज के लिए कस्टमाइज्ड क्रिस्पर थेरेपी की है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में 39 महिलाएं हैं। इस लिस्ट में छह भारतीय और छह भारतीय मूल के एक्सपर्ट्स के नाम हैं। आइए ऐसे ही लोगों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने अपने खोज से स्वास्थ्य सुविधाओं को पहले की तुलना में आसान बना दिया है।
करण सिंघल
करण सिंघल ने ओपन एआई नाम से हेल्थ टीम बनाई, जिसमें 260 डॉक्टर्स के साथ मिलकर चैटजीपीटी फॉर हेल्थकेयर तैयार किया। ये टीम लोगों को सही सलाह और इलाज देने के लिए बनाई गई।
दुनियाभर से रोजाना करीब चार करोड़ लोग इनसे कंसल्ट करते हैं। ये यूनिट लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड को भी अपलोड करने की सुविधा देती है, जिससे सही बीमारी का विश्लेषण किया जाता है।
किरण मुसुनुरु
किरण मुसुनुरु ने जीन थेरेपी एक्सपर्ट डॉ. रेबेका निक्लास के साथ मिलकर कस्टमाइज क्रिस्पर तकनीक से बच्चों की दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों के इलाज की खोज की।
किरण मुसुनुरु का फोकस जन्मजात जीन म्यूटेशन सुधारने पर है। इनकी खोज की वजह से वक्त पर इलाज मिलने से बीमारी का असर कम हो जाता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो रही है।
सिद्धार्थ मुखर्जी
सिद्धार्थ मुखर्जी मेडिकल साइंस में बड़ा टर्निंग प्वाइंट लेकर आ सकते हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के आंकोलॉजिस्ट ने रीड हॉफमैन के साथ मिलकर मानस एआई शुरू किया है, जिससे दवा की खोज में एआई की मदद ली जाती है।
सिद्धार्थ मुखर्जी ने छह महीने में लाखों वर्चुअल दवाएं बनाई हैं। इनमें से कुछ दवाइयों का ट्रायल कैंसर सेल्स पर भी किया जाएगा।
नबरुन दासगुप्ता
नबरुन दासगुप्ता लोगों में ड्रग्स की ओवरडोज को कम करने में मदद कर रहे हैं। ये अमेरिका में नशीली दवा (ओपिऑइड) का बढ़ता संकट रोकने के लिए ड्रग्स की पहचान करते हैं।
नबरुन दासगुप्ता ने ड्रग्स की ओवरडोज से जान बचाने वाली \“नलोक्सोन\“ दवा को 60 लाख लोगों तक पहुंचाया है। ये लोगों को ड्रग्स से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी ट्रेनिंग भी देते हैं।
प्रीति बंडी
प्रीति बंडी दशकों से कैंसर पर रिसर्ज कर रही हैं। इनका मानना है कि अमेरिका में हर योग्य वयस्क की फेफड़ों में कैंसर की स्क्रीनिंग से पांच साल में 62 हजार मौतें रोकी जा सकती हैं।
अमेरिकन कैंसर सोसायटी में साइंस डायरेक्टर कहती हैं- \“बेहतरीन विज्ञान ही बेहतरीन नीतियों की नींव रखता है।\“
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