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आदेश की अनसुनी करने वाले जिला जजों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, घोर लापरवाही व अवमानना माना

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इलाहाबाद हाई कोर्ट बिल्डिंग।



विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के चार जिला जजों, आगरा, अयोध्या, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद को छोड़कर अन्य जिला जजों द्वारा मांगी गई रिपोर्ट पेश नहीं कर पाने पर गहरी नाराजगी जताई है। साथ ही शेष सभी जिला जजों को एक सप्ताह में 16 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने क्या मांगा था विवरण

हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि वर्ष 2004 से 2024 तक दाखिल ऐसी पुलिस चार्जशीट का वर्षवार विवरण दिया जाए जिनमें अभी तक अदालत ने चार्ज फ्रेम नहीं किया है। कई जिला जजों ने अधूरी रिपोर्ट दी तो कुछ ने रिपोर्ट ही नहीं दी। कुछ ने स्वयं रिपोर्ट न देकर इंचार्ज से रिपोर्ट भिजवा दी। कोर्ट ने इसे घोर लापरवाही कहा। साथ ही अवमानना भी माना और कहा कि समय आने पर इस पर विचार किया जाएगा।
मामले में अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी

चार जिला जजों व अमेठी के अलावा सभी जिला जजों को आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने उर्मिला मिश्रा व अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।  
आगरा जिला जज से सीखने की नसीहत दी

हाई कोर्ट ने कहा, प्रदेश के 75 जिलों में से 49 जिला जजों ने मांगी गई रिपोर्ट भेजी है। कोर्ट ने आगरा जिला जज की रिपोर्ट की सराहना की। साथ अन्य तीन जिला जजों की रिपोर्ट भी सही पाया। अन्य जिला जजों को आगरा जिला जज से सीखने की नसीहत दी। यह भी कहा कि कुछ मामलों में दशकों बीत जाने के बाद भी जानबूझकर चार्ज फ्रेम नहीं हो सका।
हाई कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, प्रथम दृष्टया रिपोर्ट देखने से लगता है जिला जजों को आदेश समझ में नहीं आया अथवा मांगी गई जानकारी देने में विफल रहे। जिला जजों का यह आचरण संस्था पर गंभीर प्रभाव डालने वाले हैं। कोर्ट ने कहा, जिला जजों के कार्य न्यायिक अनुशासन, अदालत की प्रभुता व न्याय प्रशासन के मूल नियम को प्रभावित करेंगे।
कुल 26 जिला जजों ने रिपोर्ट ही नहीं दी

जिला जज गोपनीय रिपोर्ट तैयार करने तथा विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति करते हैं। कुछ जिलों के इंचार्ज ने रिपोर्ट दी है क्या यह कर्तव्य पालन में लापरवाही व अवमानना नहीं है? कुल 26 जिला जजों ने रिपोर्ट ही नहीं दी। बरेली व गोंडा के अलावा किसी ने समय नहीं मांगा। जिला जजों का व्यवहार संस्था के हित में उचित कार्यवाही को आमंत्रित करता है।

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