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BNP की बंपर जीत के बाद क्या है भारत प्लान, रहमान किसे चुनेंगे- हिंदुस्तान या पाकिस्तान?

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BNP की बंपर जीत के बाद क्या है भारत प्लान रहमान किसे चुनेंगे- हिंदुस्तान या पाकिस्तान (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के चलते पांच अगस्त, 2024 को शेख हसीना की अगुआई वाली अवामी लीग सरकार के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में गुरुवार को पहला आम चुनाव कराया गया। हसीना के बगैर हुए इस चुनाव का जनादेश आ गया है।

जनता ने दिवंगत खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) पर भरोसा जताया है। वह दो तिहाई बहुमत के साथ 20 साल बाद देश की सत्ता में वापसी करने जा रही है। खालिदा के बेटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री बन सकते हैं। नई सरकार के गठन के साथ ही मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के करीब 18 महीने के शासन का अंत हो जाएगा।

नतीजों से जाहिर होता है कि मतदाताओं ने कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और छात्र आंदोलन से उपजी नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) को ठुकरा दिया है।बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 299 सीटों के लिए हुए संसदीय चुनाव में बीएनपी को 212 सीटें मिली हैं।
पाकिस्तान समर्थित जमात का बुरा हाल

पाकिस्तान के साथ निकटता रखने वाली जमात-ए-इस्लामी पार्टी करीब 75 सीटें जीत चुकी है या बढ़त बनाए हुए है। एनसीपी महज छह सीटों पर सिमट गई है। जबकि अवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाई, क्योंकि उस पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया था।

चुनाव आयोग ने अभी तक चुनाव नतीजों की औपचारिक घोषणा नहीं की है। 60 वर्षीय रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की है। बीएनपी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि चुनाव जीतने पर पार्टी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे।

बीएनपी ने अपने समर्थकों से जीत का जश्न मनाने से बचने और शुक्रवार की नमाज पढ़ने को कहा। पार्टी ने एक बयान में कहा, \“ऐतिहासिक जीत के बावजूद जश्न मनाने के लिए कोई जुलूस या रैली नहीं निकाली जाएगी।\“ये चुनाव ऐसे समय कराए गए हैं, जब देश उथल-पुथल भरी राजनीतिक शून्यता, अस्थिरता और सुरक्षा की नाजुक स्थिति से गुजर रहा है।

देश में जुलाई-अगस्त, 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों और अल्पसंख्यकों खासतौर पर ¨हदुओं को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है। छात्रों के आंदोलन के चलते ही शेख हसीना को 15 साल के शासन के बाद सत्ता से हटना पड़ा था। वह उसी समय से भारत में रह रही हैं।
सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह को \“हां\“

13वें संसदीय चुनावों के साथ ही 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया है। करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने संवैधानिक संशोधन से जुड़े इस सुधार पैकेज के पक्ष में \“हां\“ कहा है। अंतरिम सरकार ने जुलाई चार्टर के इन ¨बदुओं पर चुनाव के साथ ही जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी।
जमात व एनसीपी ने धांधली के लगाए आरोप

चुनाव में 11 दलों का गठबंधन बनाकर उतरने वाली जमात-ए-इस्लामी ने शुक्रवार को धांधली और नतीजों में हेरफेर के आरोप लगाए हैं। उसने यह चेतावनी दी है कि अगर जनता का जनादेश छीना गया तो वह बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी।

पार्टी के सहायक महासचिव अहसानुल महबूब जुबैर ने आरोप लगाया कि मतगणना अधिकारी एक विशेष पार्टी के पक्ष में परिणामों में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। एनसीपी ने भी ढाका की कई सीटों के नतीजों में धांधली के आरोप लगाए हैं।
कभी बीएनपी के साथ ही रही जमात

बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 तक सत्ता में थी। तब खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं। उस समय जमात-ए-इस्लामी बीएनपी के साथ थी। सरकार में उसके दो नेता मंत्री के रूप में कार्यरत थे। शेख हसीना सरकार के दौरान 2013 में जमात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 2024 में अंतरिम सरकार गठित होने पर जमात पर से प्रतिबंध हटा लिया गया था। 2026 के चुनाव में बीएनपी और जमात में मुख्य मुकाबला माना गया था।
एक नजर में चुनाव

एक प्रत्याशी के निधन के चलते 299 सीटों पर हुए चुनाव, 151 सीट जीतने पर सामान्य बहुमत- 50 राजनीतिक दलों के 1755 व 273 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई- 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 60 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

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