वन नेशन-वन इलेक्शन: पूर्व CJI गवई ने JPC सामने रखा अपना पक्ष
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का निष्कर्ष के करीब है। गुरुवार को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने अपना पक्ष रखा। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई ने गुरुवार को संयुक्त संसदीय समिति को बताया कि एक साथ चुनाव कराने वाला बिल संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर का उल्लंघन नहीं करता है।
भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अगुवाई वाली संयुक्त संसदीय समिति के सामने पेश होने वाले छठे पूर्व सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि अगर यह बिल लागू होता है, तो इससे न तो संघीय संरचना पर असर पड़ेगा और न ही लोकतांत्रिक शासन के तरीके पर, बल्कि यह प्रस्तावित कानून बेसिक स्ट्रक्चर के मुताबिक होगा।
बिल संविधान नहीं करता उल्लंघन
एक देश एक चुनाव बिल आमतौर पर 129वें संविधान (संशोधन) बिल के नाम से जाना जाता है, चुनावों के तरीके में सिर्फ एक बार बदलाव लाता है, जबकि चुनावों का स्ट्रक्चर और वोटरों के अधिकार वही रहते हैं।
गवई के सपोर्ट से उत्साहित चौधरी ने कहा कि विपक्षी पार्टियों को बिल का सपोर्ट करने के लिए रूलिंग अलायंस में शामिल होना चाहिए ताकि प्रस्तावित कानून एक जैसा बन सके और लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने का रास्ता साफ हो सके। उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा कि यह देश के हित में है।
सभी पार्टियों से समर्थन की उम्मीद
सभी पार्टियों को अपने राजनीतिक हित को किनारे रखकर इस प्रपोजल का समर्थन करना चाहिए। ज्यादातर कानून विशेषज्ञ को बिल में कोई संवैधानिक गलती नहीं मिली है।
पूर्व चीफ जस्टिस ने इस आलोचना को खारिज कर दिया जिसमें पार्लियामेंट के अधिकार पर सवाल उठाया गया था क्योंकि बिल राज्यों पर भी असर डालता है और कहा कि लेजिस्लेचर के पास अधिकार है।
भारत में 1967 तक एक साथ चुनाव होते थे। विपक्षी पार्टियों के पूरे ग्रुप ने इस बिल की निंदा करते हुए इसे भारत के फेडरल स्ट्रक्चर पर हमला बताया है और इसके समर्थन में सरकार की दलीलों पर सवाल उठाए हैं।
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