दिसंबर तक भटनी से औंड़िहार तक तैयार हो जाएगी डबल रेल लाइन। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल स्थित औंड़िहार-वाराणसी (31.36 किमी) तीसरी रेल लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार कार्य योजना के तहत निर्माण कार्य के लिए 497.07 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दी है। यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी एवं गाजीपुर जनपद में स्थित है।
भटनी से औंड़िहार के बीच डबल लाइन बिछ जा रही है। कीड़िहरापुर-इन्दारा, सादात-औंड़िहार, भटनी-पिवकोल, बेलथरा रोड-कीड़िहरापुर, दुल्लहपुर-सादात, मऊ-दुल्लहपुर खंडों सहित कुल 89.47 किमी का कार्य पूरा हो चुका है। शेष पिवकोल से बेलथरा रोड (27.53 किमी) खंड के दोहरीकरण का कार्य भी अंतिम चरण में है। जिसमें सरयू नदी पर महत्वपूर्ण तुर्तीपार रेल पुल का निर्माण शामिल है।
दिसंबर तक डबल लाइन का कार्य भी पूरा हो जाएगा। यह दोहरीकरण परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश में देवरिया, बलिया, मऊ एवं गाजीपुर जनपद में स्थित है। भटनी-औंड़िहार खंड के विद्युतीकरण सहित दोहरीकरण कार्य 1177.96 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।
डबल लाइन और थर्ड लाइन बिछ जाने से गोरखपुर-वाराणसी-प्रयागराज रेलमार्ग की रेल लाइन क्षमता बढ़ जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में भी यात्रियों की मांग के अनुसार अधिक संख्या में ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। विद्युतीकरण सहित इस दोहरीकरण रेल लाइन का निर्माण होने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
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पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के अनुसार औंड़िहार एक प्रमुख जंक्शन स्टेशन है, औंड़िहार में मेमू शेड भी है। औंड़िहार-वाराणसी दोहरी लाइन खंड पर बड़ी संख्या में यात्री एवं माल गाड़ियों का संचलन किया जाता है। औंड़हार से दरभंगा, रक्सौल, जयनगर, छपरा, गया, टाटानगर, कोलकाता, मऊ, गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, दुर्ग, पुणे, मुम्बई, गोंदिया, गुवाहाटी, नई दिल्ली आदि शहरों के लिए ट्रेनों का आवागमन होता है।
इस रेलमार्ग पर तीसरी रेल लाइन निर्माण की मांग की जा रही थी। रेल मंत्रालय ने मांग को पूरा करते हुए तीसरी रेल लाइन निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इस तीसरी लाइन निर्माण परियोजना के फलस्वरूप इस खंड की लाइन क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे दोनों तरफ से अतिरिक्त यात्री गाड़ियों का संचालन संभव हो सकेगा।
प्रति वर्ष 1.99 मिलियन टन माल का अतिरिक्त ट्रैफिक मिलेगा, जिसके फलस्वरूप रेल राजस्व में वृद्धि होगी। बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां बढ़ेंगी। क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ेगा। |