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छात्रों से बात करते विधायक और प्रशासन। (जागरण)
जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज निवासी धर्मेंद्र परासर की पुत्री व सीतामढ़ी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंजीनिरिंग) कॉलेज की छात्रा मेघा परासर की मौत पर शनिवार को आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने जमकर बवाल काटा।
मेघा को न्याय दिलाने व कॉलेज के प्राचार्य को हटाने की मांग को लेकर आक्रोशित छात्र-छात्रा धरना पर बैठ कॉलेज प्रशासन के विरोध में जमकर नारेबाजी की। आक्रोशितों के तेवर को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने इसकी सूचना जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को दी।
सूचना पर पहुंचे एसडीओ सदर आनंद कुमार ने आक्राशितों को समझाने-बुझाने की कोशिश की लेकिन वे प्राचार्य को हटाने की मांग पर डटे रहे। फिर एसडीपीओ राजीव कुमार सिंह, डुमरा थानाध्यक्ष मुकेश कुमार पहुंचे। स्थिति को देखते हुए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल को बुलाया गया।
काफी मशक्कत के बाद छात्रों से मांग पत्र लिया गया। एसडीओ सदर के आश्वासन के बाद छात्रों को गुस्सा शांत हुआ। इसे लेकर पूरे दिन कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियां बाधित रही। वहीं, यूनिवर्सीटी के निर्देश पर कॉलेज में संचालित परीक्षा केंद्र को बदलकर पुपरी पॉलिटेक्निक कॉलेज में स्थानानांतरण किया गया।
प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार के अनुसार शनिवार को आयोजित होने वाली परीक्षा पुपरी स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज में लिया गया।
विधायक ने कॉलेज की अनियमितता से डीएम को कराया अवगत
छात्रा की मौत की सूचना पर पहुंचे विधायक सुनील कुमार पिंटू ने छात्र-छात्राओं से बात की। उन्होंने कॉलेज में व्याप्त अनियमितताओं की जानकारी डीएम रिची पांडेय की।
उन्हाेंने डीएम से कहा है कि उक्त कॉलेज में स्वास्थ्य संबंधी कोई व्यवस्था नहीं, छात्राओं के छात्रावास में लिफ्ट खराब है, जेनरेटर होते हुए भी इसका उपयोग नहीं किया जाता है। शुद्ध पेयजल का अभाव है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कराने एवं दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का निर्देश दिया।
समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो बच सकती थी मेघा की जान
कॉलेज की छात्र छात्राओं ने बताया कि गुरुवार को मेघा बाथरूम से आयी और बिछावन पर लेट गई। कमजाेरी संबंधी शिकायत करते हुए अपने मां को फोन लगाई। वह बात करते हुए रो रही थी। हमलोगों ने बीपी चेक किया तो उसका बीपी हाई था। उसका हाथ नहीं उठ रहा था। हमलोगों ने प्राचार्य को सूचना दी। लेकिन कोई एंबुलेंस नहीं बुलाया गया।
प्राचार्य अपना वाहन देने में आनाकानी कर रहे थे, ड्राइवर के नहीं होने का बहाना बनाते रहे। हमलोग दबाव देने लगे तो उनकी वाहन निकाला गया। लेकिन इसी बीच एक अन्य प्रोफेसर के वाहन से मेघा को सीतामढ़ी सदर अस्पताल पहुंचाया गया।
वहां से डॉक्टर ने एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। यहां से भी डॉक्टर ने पीएमसीएच रेफर कर दिया। पटना में मेघा ने दम तोड़ दिया। कहा कि अगर समय पर मेघा को अस्पताल पहुंचाया गया होता तो शायद उसकी जान बच जाती।
मेघा की तबीयत पहले से भी खराब चल रही थी। उनके माता-पिता से भी बात किया गया है। मेघा की मौत इलाज के दौरान की हुई है। तबीयत बिगड़ने की सूचना पर मेघा को कॉलेज के प्रोफेसर व कुछ छात्रों के साथ उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया था। छात्रों द्वारा लगाया गया आरोप गलत है। -
प्रो. सुनील कुमार, प्राचार्य, एसआईटी। |
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