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कट गया ट्रैफिक चालान? 45 दिन में नहीं किया चैलेंज तो भरना पड़ेगा जुर्माना, क्या है नया नियम?

deltin33 3 hour(s) ago views 110
  

ट्रैफिक चालान के नए नियम।



ऑटो डेस्क, नई दिल्‍ली। अगर आपके नाम ट्रैफिक चालान कट गया है, तो क्या आपको हर हाल में उसे भरना ही पड़ेगा? नहीं। अब आप चालान को चैलेंज भी कर सकते हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय ने ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट से जुड़े अपराधों के लिए चालान/ई-चालान के भुगतान, आपत्ति और निपटारे की स्पष्ट प्रक्रिया और तय समय-सीमा अधिसूचित कर दी है। इन नए नियमों के पीछे एक अहम कारण भी बताया गया है कि देशभर में केवल करीब 38 प्रतिशत ई-चालान ही भुगतान किए जा रहे हैं। कई जगहों पर ब्लैंकेट राहत जैसी घोषणाएं भी हुई हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग के उद्देश्य को कमजोर करती हैं। आइए जानते हैं कि अब चालान कटने के बाद आपके पास क्या विकल्प हैं, कब तक आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं और अगर भुगतान न किया तो क्या होगा।
क्या ट्रैफिक चालान को चैलेंज किया जा सकता है?

मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, चालान मिलने पर आपके पास दो ऑप्शन हैं। पहला चालान स्वीकार करके भुगतान करें, या 45 दिनों के भीतर उसे चैलेंज करें। चैलेंज करने की प्रक्रिया echallan.parivahan.in पोर्टल के जरिए होगी। यहां आपको डॉक्यूमेंटरी सबूत के साथ शिकायत या आपत्ति दर्ज करनी होगी।
चालान चैलेंज करने की नई टाइमलाइन क्या है?

चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर आपको उसे चैलेंज करना होगा। अगर आपने 45 दिनों में चालान को चैलेंज नहीं किया, तो इसे स्वतः स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद आपको चालान की राशि अगले 30 दिनों में भुगतान करनी होगी। मतलब कुल मिलाकर चालान जारी होने के बाद 75 दिन (45+30) तक का समय मिलेगा।
पहले क्या था और अब क्या बदला ?

पहले, अगर चालान का भुगतान 90 दिनों तक नहीं होता था, तो वह ऑटोमैटिक वर्चुअल कोर्ट में चला जाता था। जब मामला कोर्ट में लंबित होता था, तो ट्रांसपोर्ट विभाग RC और DL से जुड़ी सेवाओं जैसे RC ट्रांसफर, RC रिन्यूअल, डुप्लीकेट DL, NOC और PUCC जैसी सुविधाओं को रोक नहीं पाता था। इसी वजह से बहुत से लोग चालान इग्नोर करते रहे और कई बार आपत्ति भी नहीं उठाई। नए नियम के मुताबिक, अब कोई चालान ऑटोमैटिक कोर्ट में नहीं जाएगा।
अगर आप चालान को चुनौती देते हैं तो क्या होगा?

अगर आपने पोर्टल पर चालान को चैलेंज कर दिया, तो संबंधित डिजाइनेटेड अथॉरिटी को आपकी बात सुनकर और सबूत देखकर 30 दिनों के भीतर फैसला देना होगा। अगर सबूत सही पाए गए तो अथॉरिटी चालान को रद्द कर सकती है। इसके लिए उसे लिखित आदेश रिकॉर्ड करके पोर्टल पर अपलोड करना होगा। अगर आपत्ति खारिज हो गई, तो अथॉरिटी को कारण लिखित रूप में रिकॉर्ड करने होंगे। ऐसे में आपको पोर्टल पर आदेश अपलोड होने के बाद 30 दिनों के भीतर चालान का भुगतान करना होगा।
अगर फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो क्या कर सकते हैं?

ऐसी स्थिति में आवेदक कोर्ट में आवेदन कर सकता है, लेकिन इसके लिए पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। अगर कोई व्यक्ति अथॉरिटी के आदेश के 30 दिनों के भीतर न तो भुगतान करता है और न ही कोर्ट में चुनौती देता है, तो इसे फिर से स्वतः स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद उसे चालान की राशि अगले 15 दिनों में भुगतान करनी होगी।
अगर आप चालान फिर भी नहीं भरते तो क्या होगा?

नए नियमों में भुगतान न करने पर कार्रवाई ज्यादा सख्त बताई गई है। आपको निर्धारित डेडलाइन तक रोजाना नोटिस भेजा जाएगा। भुगतान न होने तक लाइसेंसिंग/रजिस्टरिंग अथॉरिटी आपकी कई सेवाएं प्रोसेस नहीं करेगी। सिर्फ टैक्स से जुड़े मामलों को छोड़कर बाकी आवेदन रोके जा सकते हैं। आपकी DL या गाड़ी को पोर्टल पर “Not to be Transacted” फ्लैग कर दिया जाएगा। यह जानकारी ऑटोमैटिक आपको भी इंटिमेट की जाएगी।
क्या ये नियम हर तरह के चालान पर लागू होंगे?

ये नियम केवल समझौता योग्य चालान पर लागू होंगे, यानी वे चालान जो स्पॉट पर या पोर्टल के जरिए भुगतान किए जा सकते हैं। वहीं, गैर-समझौता योग्य चालान सिर्फ कोर्ट में ही निपटाए जा सकते हैं। हालांकि, इनपुट के अनुसार अधिकांश मौजूदा गैर-समझौता योग्य अपराध को जल्द समझौता योग्य बनाने की बात कही गई है, जो जन विश्वास विधेयक 2.0 के जरिए प्रस्तावित है और इसे संसद में पेश किया गया है।
चालान जनरेट और जारी करने की प्रक्रिया क्या होगी?

चालान जारी करने का अधिकार यूनिफॉर्म में मौजूद कोई भी पुलिस अधिकारी, या राज्य/UT द्वारा अधिकृत अन्य अधिकारी चालान जारी किया जा सकता है। फिजिकल चालान या इलेक्ट्रॉनिक चालान (ई-चालान) इसके अलावा, राज्य इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग/एनफोर्समेंट सिस्टम से ऑटो-जनरेट कर सकते हैं, या अधिकारियों द्वारा मैनुअली जनरेट कर सकते हैं।
नए नियमों में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

हालांकि यह प्रक्रिया ट्रैफिक नियमों का पालन बढ़ाने और उल्लंघन रोकने के लिए लाई गई है, लेकिन इनपुट के अनुसार एक समस्या यह है कि कुछ राज्यों ने अभी तक शिकायतों की सुनवाई और निपटारे के लिए अथॉरिटी को नोटिफाई नहीं किया है।
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