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गोरखपुर विश्वविद्यालय में शुरू होंगे छह ऑनलाइन पाठ्यक्रम, जनवरी सत्र से ही मिलेगा प्रवेश

cy520520 8 hour(s) ago views 706
  

छह नए पाठ्यक्रमों के संचालन के प्रस्ताव को मिली यूजीसी से मंजूरी



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा केंद्र को एक और अकादमिक उपलब्धि हासिल हुई है। छह नए आनलाइन पाठ्यक्रमों के प्रस्ताव को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के डिस्टेंस लर्निंग ब्यूरो से ऑनलाइन लर्निंग (ओएल) व ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) मोड में संचालन की स्वीकृति प्राप्त हो गई है। इस स्वीकृति के साथ ही विश्वविद्यालय में अब ओएल व ओडीएल पद्धति से कुल 11 पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

स्वीकृति मिलने के बाद जनवरी सत्र से ही इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की जा रही हैं। नए पाठ्यक्रमों में स्नातक स्तर पर तीन विषयों के संयोजन के साथ बीए की शुरुआत की जा रही है, जिसमें अंग्रेजी, समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान शामिल हैं। वहीं परास्नातक स्तर पर एमए अर्थशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र तथा एमएससी गणित के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

विश्वविद्यालय में ओएल एवं ओडीएल विधि से आनलाइन पढ़ाई की शुरुआत जुलाई-2025 सत्र से हुई थी। पहले चरण में बीकाम, एमकाम, बीबीए, एमबीए और एमए अंग्रेजी पाठ्यक्रम शुरू किए गए थे। प्रवेश प्रक्रिया में देरी के बावजूद पहले सत्र में लगभग 396 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया, जिससे आनलाइन शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की रुचि स्पष्ट रूप से सामने आई। नए पाठ्यक्रम जुड़ने के साथ अब स्नातक स्तर पर तीन और परास्नातक स्तर पर आठ कार्यक्रम उपलब्ध हो गए हैं।

यह भी पढ़ें- गोरखपुर विश्वविद्यालय में व्याख्यान के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का हंगामा, करना पड़ा स्थगित

ऑनलाइन पाठ्यक्रम में पंजीकृत विद्यार्थियों को मिलेगी यह सुविधा
ऑनलाइन लर्निंग प्रणाली के अंतर्गत पंजीकृत विद्यार्थियों को इंटरएक्टिव डिजिटल कंटेंट, लाइव एवं रिकार्डेड लेक्चर, आनलाइन मूल्यांकन और अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग स्व-अध्ययन सामग्री और अनुकूल पाठ्यक्रम संरचना पर आधारित है, जो नौकरीपेशा लोगों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, गृहिणियों और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी, ऐसा विश्वविद्यालय प्रशासन का विश्वास है।




यह स्वीकृति विश्वविद्यालय की अकादमिक परिपक्वता और डिजिटल तत्परता का प्रमाण है। ओएल और ओडीएल कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा को अधिक सुलभ, लचीला और समावेशी बनाएंगे। विश्वविद्यालय का लक्ष्य उन विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है, जो नियमित मोड से जुड़ नहीं पाते। भविष्य में उद्योग और रोजगार की मांग के अनुरूप और अधिक नवाचारी व कौशल-आधारित पाठ्यक्रम भी इन मोड में शुरू किए जाएंगे।
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-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय
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