ढिबरी से सोलर तक: अंधेरे में डूबे गांवों की बदली तक़दीर।
संजय कृष्ण, रांची। सिमडेगा जिले से करीब चालीस किमी दूर सुदूर पहाड़ पर स्थित बाकीपोना गांव आज भी अंधेरे में है। गांव तक पहुंचने के लिए तीन किमी रास्ता बेहद खराब और ऊबड़-खाबड़ है। यहां करीब अस्सी घर उरांव आदिवासियों के हैं।
2023 में यहां टीआरआई (ट्रांसफार्म रुरल इंडिया) के सहयोग से और टाटा कैपिटल की आर्थिक मदद से सौर ऊर्जा से गांव ढिबरी युग से बाहर आया है। अभी यहां ट्रायल ही चल रहा है।
यहां के सहायक पारा शिक्षक नेलसन मिंज कहते हैं, पिछले दो साल पहले सोलर से बिजली मिल रही है। तब से अब तक दो मिनट के लिए भी बिजली नहीं कटी है। इसके लिए गांव में समिति बनी है। वही हर माह बिल की वसूली भी करती है।
सिमडेगा कई गांव के टोलों में अभी भी नहीं पहुंची बिजली
चार सौ की आबादी वाले इस गांव की जिंदगी बिना बिजली कैसे चल रही थी, इसकी कल्पना कर सकते हैं। सोलर आने से जीवन में भी उजियारा फैला है। मोबाइल चार्ज से लेकर लोगों ने अपने घरों में आटा चक्की भी लगा रखी है। सब्जी उगाने के लिए खेतों में कुएं से पानी भी पहुंचा रहे हैं। गांव की सरोजनी मिंज कहती हैं, दो साल पहले तक हम लोग ढिबरी के सहारे ही रहते थे।
ढिबरी में ही बच्चे पढ़ते थे। गांव के पास से एक नदी बहती है-बाकी। बारिश के समय ही इसमें बहाव रहता है। इसी से किसान सिंचाई करते हैं। एक ही फसल उगा पाते हैं-धान। केरसेई प्रखंड से 20 किमी दूर बसा यह गांव पूरी तरह प्रकृति पर ही निर्भर है।
लोगों का जीवन भी जंगल से ही चलता है। लाह, मडुआ, चिरंजी आदि वनोपज से ही घर चलता है। हां, मइयां योजना और सरकारी योजनाएं जरूर गांव तक पहुंची हैं।
सिमडेगा के गांवों में सोलर मॉडल कामयाब
टीआरआई के प्रशांत कहते हैं कि सिमडेगा जिले में करीब 70 गांवों में सोलर ग्रीड लग गया है। 19 गांवों में सोलर ग्रीड लग रहा है। यानी, सरकार ने इन गांवों तक अभी बिजली नहीं पहुंचाई है। बोलबा के रेंगारबाहर गांव का हाल भी यही था।
यहां करीब सौ से ऊपर घर थे और पिछले साल 24 जनवरी को यहां सोलर से बिजली दी जा रही है। हर घर से सौ रुपये तो निर्धारित है। यदि मोटर लगा है तो उसके लिए अलग से चार्ज देना होता है। यहां छह सौ रुपये प्रतिमाह में मोटर भी चला सकते हैं। पानी के लिए, आटा चक्की के लिए या सिंचाई के लिए।
अब मोबाइल घर पर चार्ज कर पा रहे
“रोड के लिए भूषण बाड़ा विधायक को कई बार पत्र दिया गया, लेकिन कुछ किया नहीं। सोलर से बिजली मिल रही है। अब मोबाइल भी चार्ज होता है। बच्चे भी पढ़ते हैं। दो साल में कभी बिजली कटी नहीं।“
-नेलसन मिंज, सहायक पारा शिक्षक, बाकीकोना
“दो साल पहले तक बहुत परेशानी होती थी। लेकिन अब गांव में बिजली मिल रही है। पहले बहुत दिक्कत होती थी। कोई सुनने वाला भी नहीं था। गांव में बनी समिति ही देखरेख भी करती है।“
-सरोजनी मिंज, बाकीकोना
सिमडेगा जिले के छह सौ से ऊपर टोलों में बिजली नहीं पहुंची है। हालांकि 170 टोलों में काम हो गया है। बाकी टोलों में काम चल रहा है। अगस्त-सितंबर तक सभी टोलों में बिजली पहुंच जाएगी।
-मनीष चंद्रपूर्ति, विद्युत कार्यपालक अभियंता, सिमडेगा |
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