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देहरादून में जंगल की आग से निपटने को प्रशासन अलर्ट, उपकरण खरीद के लिए 45 लाख स्वीकृत

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जागरण संवाददाता, देहरादून। गर्मियों की दस्तक से पहले ही जंगलों में आग की आशंका को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जनपद स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन समिति की बैठक में साफ कर दिया गया कि इस बार जंगल की आग को लेकर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में जंगल की आज की रोकथाम को मजबूत करने के लिए 45 लाख रुपये की उपकरण खरीद को मौके पर ही स्वीकृति दी गई। रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाने वाली वन पंचायतों, समुदायों और व्यक्तियों को पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि फायर सीजन के दौरान पटवारी चौकियों को त्वरित क्रू-स्टेशन के रूप में सक्रिय रखा जाए, ताकि आग की सूचना पर स्थानीय स्तर से ही त्वरित कार्रवाई हो सके।

इसके साथ ही आपदा प्रबंधन प्रणाली के तहत हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे कंट्रोल रूम, वायरलेस संचार व्यवस्था और सभी अग्नि क्रू-स्टेशन हर समय सक्रिय रहेंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि जंगल की आग की रोकथाम केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है।

उन्होंने ब्लाक व ग्राम पंचायत समितियों को पूरी तरह से सक्रिय रखने और वन पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं तथा महिला स्वयं सहायता समूहों की सहभागिता से जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। विशेष रूप से आरक्षित वन क्षेत्रों में स्थित गुज्जर बस्तियों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, एडीएम कृष्ण कुमार मिश्र, डीएफओ कालसी मयंक गर्ग, डीएफओ चकराता वैभव कुमार, डीएफओ मसूरी अमित कंवर, ओसी सीलिंग स्मृता परमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग राजीव कुमार, क्षेत्राधिकारी पुलिस अंकित कंडारी आदि उपस्थित रहे।
स्कूलों से जागरूकता, रेंज स्तर पर माक ड्रिल

जिलाधिकारी ने विद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने और प्रत्येक वन प्रभाग की हर रेंज में माक ड्रिल व प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि फील्ड स्तर पर असर दिखना चाहिए।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून नीरज कुमार ने जानकारी दी कि दून में कुल 2.25 लाख हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र है। जिले के पांच वन प्रभाग कालसी, चकराता, मसूरी, राजाजी टाइगर रिजर्व और देहरादून शामिल हैं, जिनमें कालसी और मसूरी आग की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में 189, 2024 में 183 आग की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2022 में 59, 2023 में 50 और 2025 से अब तक 21 घटनाएं सामने आई हैं।
127 क्रू-स्टेशन, कई स्तरों पर निगरानी

जिले में जंगल की आग नियंत्रण के लिए 127 क्रू-स्टेशन स्थापित किए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा पट्टियों, मोटर मार्गों, अश्व मार्गों, अग्नि बटिया निर्माण और कंट्रोल बर्निंग का कार्य किया जा रहा है। आग की सूचना के लिए हेल्पलाइन 1926, आपदा कंट्रोल रूम 1077 और ‘फारेस्ट फायर उत्तराखंड’ मोबाइल एप को सक्रिय रखा गया है।

जिलाधिकारी ने राजस्व, पुलिस, फायर, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, जल संस्थान, आपदा प्रबंधन, दूरसंचार व एसडीआरएफ को फायर सीजन में आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्रू-स्टेशन पर वाहन, उपकरण, संचार व्यवस्था और फायर वाचर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
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