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जामा मस्जिद के अंदर-आसपास दुकान लगाने वाले हो जाएं सतर्क, दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला; MCD करेगी कार्रवाई

LHC0088 2026-1-7 18:56:51 views 664
  

दिल्ली हाई कोर्ट ने जामा मस्जिद के अंदर और आसपास के अवैध निर्माण व अतिक्रमण पर दिल्ली नगर निगम (MCD) को दो महीने में सर्वे करने का आदेश दिया है। सोशल मीडिया



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को अवैध निर्माण और अतिक्रमण से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) को जामा मस्जिद के अंदर और आसपास के पूरे इलाके का सर्वे करने का आदेश दिया। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि सर्वे में अतिक्रमण और अवैध निर्माण से बनी इमारतों और दुकानों को हटाने की कार्रवाई भी शामिल हो।

बेंच ने फरहत हसन और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर MCD को दो महीने के अंदर सर्वे पूरा करने का निर्देश दिया। इस निर्देश के साथ ही कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। पुरानी दिल्ली के स्थानीय निवासियों ने जामा मस्जिद के आसपास सार्वजनिक पार्कों और अन्य अवैध निर्माणों से अतिक्रमण हटाने के लिए MCD को निर्देश देने की मांग करते हुए PIL दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सार्वजनिक ज़मीन पर अवैध पार्किंग, अस्पताल, फेरीवाले और कमर्शियल दुकानें चल रही हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि शाही इमाम और उनके रिश्तेदारों ने मस्जिद के आसपास खुली जगहों पर निजी घर बनाकर अतिक्रमण कर लिया है। यह भी तर्क दिया गया कि मीनारों पर कोल्ड ड्रिंक की दुकानें और पेड टॉयलेट चलाए जा रहे हैं।

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याचिका में अवैध निर्माण और अतिक्रमण दिखाने वाली तस्वीरें भी शामिल थीं। हालांकि, बेंच ने कहा कि इन तस्वीरों की सच्चाई की पुष्टि सर्वे के बाद ही की जा सकती है। पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है और राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है। याचिका में कहा गया था कि जामा मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड के नियंत्रण में है और शाही इमाम मस्जिद की छत पर कैफे चलाकर वक्फ संपत्ति का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकते।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि इमाम, उनका परिवार और करीबी सहयोगी मस्जिद को निजी आय के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते दिख रहे हैं, जो धार्मिक पवित्रता, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विरासत संरक्षण नियमों और दिल्ली नगर निगम अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है।

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