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बलिदान हुआ हापुड़ का लाल रिंखिल, पूरे गांव में पसरा मातम; मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

Chikheang Yesterday 12:56 views 323
  

हापुड़ का रिंखिल बालियान बलिदान हो गया। जागरण



केशव त्यागी , हापुड़। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में बृहस्पतिवार को हुए सड़क हादसे में भारतीय सेना का बुलेटप्रूफ ट्रक भदरवाह-तंबा अंतरराज्यीय मार्ग पर अनियंत्रित होकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण दुर्घटना में देश की सेवा करते हुए दस जवान बलिदान हो गए, जबकि 11वां जवान गंभीर रूप से घायल हो गया।

इस हादसे में शहीद हुए जवानों में हापुड़ के हाफिजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भटैल के सैनिक रिंखिल बालियान भी शामिल हैं। जैसे ही शहादत की सूचना गांव पहुंची, तो परिजनों में कोहराम मच गया। शहीद के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया और पूरे गांव में मातम छा गया। हर आंख नम थी और हर जुबां पर बस एक ही बात थी, गांव ने अपना वीर सपूत खो दिया। सभी बलिदान के शव का आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  

रिंखिल बालियान का फाइल फोटो। जागरण

वीर सपूत के परिजनों ने बताया कि रिंखिल बालियान 2016 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वह एक अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और साहसी सैनिक के रूप में जाने जाते थे। वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में थी।

बताया कि हादसे के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली। बलिदान हुए जवान की मां मंजू देवी और पत्नी रिंकी का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवार को संभालना मुश्किल हो रहा है। गांव की महिलाएं और रिश्तेदार लगातार उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं।
पांच वर्ष पहले हुई थी शादी

बलिदानी रिंखिल की शादी करीब पांच वर्ष पूर्व हुई थी। उनके परिवार में तीन वर्ष की एक बेटी और एक वर्ष का एक बेटा है, जो अभी अपने पिता की शहादत का अर्थ भी नहीं समझ सकते। इस दृश्य ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। रिंखिल का छोटा भाई ऋषभ बालियान भी भारतीय सेना में सेवारत है। एक ही परिवार के दो जवानों का देश सेवा में होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।

यह भी पढ़ें- हापुड़ में मां का शव रखकर दो घंटे किया हंगामा, बेटे को चौकी में बंद करने वाला दारोगा सस्पेंड

ग्रामीणों ने बताया कि रिंखिल बालियान की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए हमारे जवान हर समय अपने प्राणों की आहुति देने को तत्पर रहते हैं। गांव भटैल का यह वीर सपूत भले ही आज हमारे बीच न हो, लेकिन उनकी वीरता और बलिदान सदैव याद किया जाएगा।
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