कांग्रेस के प्रदेश कप्तान गणेश गोदियाल। फाइल फोटो
रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून। प्रदेश में कांग्रेस की छोटी कार्यकारिणी का दांव कितना कारगर रहता है, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन इसने प्रदेश संगठन को बड़ी दुविधा में डाल दिया है। जिन क्षत्रपों को साधकर अगले विधानसभा चुनाव का युद्ध लड़ा जाना है, नयी कार्यकारिणी में उनके गिने-चुने चहेतों को ही स्थान मिल पाएगा। असंतोष की यह चिंगारी सुलगने के अंदेशे को देखते हुए नयी कार्यकारिणी की घोषणा से पहले दिग्गजों को दिल्ली बुलाया जा सकता है। माना जा रहा है कि आगामी फरवरी माह के पहले या दूसरे सप्ताह तक कप्तान गणेश गोदियाल को उनकी टीम मिल जाएगी।
कांग्रेस हाईकमान उत्तराखंड को लेकर सतर्क भी और सधे ढंग से कदम आगे बढ़ा रहा है। अलग उत्तराखंड प्रदेश बनने के बाद से ही सत्ता के लिए कांग्रेस यहां भाजपा के साथ सीधे मुकाबले में है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ किए गए संगठन सृजन अभियान के शुरुआती चरण में इस प्रदेश को सम्मिलित किया गया। मात्र डेढ़ वर्ष पहले बनाए गए 27 सांगठनिक जिलाध्यक्षों को नये अभियान के अंतर्गत बदला गया। इनमें ऐसे काे ही बहाल रखा गया, जिनका रिकार्ड ठीक रहा। दो महीने पहले ही नये प्रदेश अध्यक्ष के रूप में गणेश गोदियाल की नियुक्ति की गई है। लगभग छह वर्ष में तीन बार प्रदेश अध्यक्ष बदले, लेकिन कार्यकारिणी का स्वरूप यथावत रहा है।
अध्यक्ष बदले, छह वर्ष से नहीं बदली टीम
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से लगभग छह माह पहले प्रदेश अध्यक्ष पद प्रीतम सिंह से लेकर गणेश गोदियाल को सौंपा गया था। तब से अभी तक प्रीतम सिंह के कार्यकाल में गठित कार्यकारिणी ही अब तक काम कर रही है। जबकि, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद प्रदेश अध्यक्ष को पार्टी ने बदल दिया था। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में करन माहरा ने अपने तकरीबन सवा तीन वर्ष के कार्यकाल में पुरानी कार्यकारिणी के साथ कदमताल की। नयी कार्यकारिणी गठित करने की माहरा की कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई। पार्टी ने उन्हें नयी कार्यकारिणी तो नहीं दी, लेकिन वरिष्ठ कांग्रेसजनों को सम्मिलित कर प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति गठित कर दी। इसके बाद समिति की देखरेख में ही महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
नयी कार्यकारिणी के लिए अग्नि परीक्षा होंगे चुनाव
अब गणेश गोदियाल को दूसरी बार विधानसभा चुनाव से तकरीबन सालभर पहले प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा मिला है। उन्हें नयी कार्यकारिणी मिलना तय है, लेकिन शर्त यह भी रखी गई है कि इसका आकार 60 से 70 तक सिमट सकता है। यह छोटा आकार ही बड़े नेताओं को बांधे रखना ही बड़ी चुनौती है। पिछली बार 230 व्यक्तियों को कार्यकारिणी में समायोजित किया गया था। यह चुनौती सिर्फ प्रदेश संगठन के लिए ही नहीं, पार्टी हाईकमान के सामने भी है। पार्टी ने उत्तराखंड में संगठन को मजबूत करने और गुटीय खींचतान पर काबू पाने के लिए ही छोटी कार्यकारिणी के फार्मूले पर बढ़ने का निर्णय लिया है। वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव में इसी कार्यकारिणी को अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा।
ब्लाक अध्यक्षों की सूची होगी जारी
कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा भी पिछले दिनों देहरादून दौरे के दौरान कार्यकारिणी का आकार छोटा रखने के संबंध में पार्टी का रवैया यथावत रहने का स्पष्ट संकेत दे चुकी हैं। प्रदेश कार्यकारिणी से पहले सांगठनिक ब्लाक अध्यक्षों की नयी सूची जारी करने की तैयारी है। इसे लेकर पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट प्रदेश संगठन को मिलना प्रारंभ हो गई है। इस माह के अंत यानी 31 जनवरी से पहले ब्लाक अध्यक्ष घोषित किए जा सकते हैं।
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