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33 वर्षों के इंतजार के बाद लालपुर पल्ली को मिला गिरजाघर, रांची के ईसाई समुदाय में आकर्षण का केंद्र संत जेम्स चर्च

cy520520 2026-1-21 11:56:47 views 908
  

रांची का नया चर्च लालपुर में, ईसाई समुदाय के आकर्षण का केंद्र बना।



जागरण संवाददाता, रांची। रांची काथलिक महाधर्मप्रांत के अंतर्गत लालपुर पल्ली के विश्वासियों के लिए 18 जनवरी 2026 का रविवार ऐतिहासिक दिवस साबित हुआ। 33 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद उन्हें अपना स्थायी गिरजाघर मिल गया।

महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने नवनिर्मित संत जेम्स गिरजाघर का विधिवत आशीष एवं उद्घाटन किया। यह अवसर न केवल धार्मिक एकता का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी रांची के ईसाई समुदाय में नया आकर्षण केंद्र बन गया है।

नया गिरजाघर अब प्रार्थना स्थल से आगे बढ़कर सामाजिक एकता, युवा गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक विकास का मजबूत केंद्र बन चुका है। पल्लीवासी मानते हैं कि यह आने वाली पीढ़ियों के विश्वास और संस्कारों को सशक्त आधार प्रदान करेगा।
उत्साह और भक्ति से भरा स्वागत

समारोह में महाधर्माध्यक्ष का पल्ली परिसर में पारंपरिक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ भव्य स्वागत किया गया। मुख्य द्वार पर फीता काटने के बाद निर्माण एजेंसी ने चाभी सौंपी। स्मारक पट्ट का अनावरण कर जुलूस के साथ महाधर्माध्यक्ष ने गिरजाघर में प्रवेश किया
हजारों विश्वासियों की उपस्थिति

मुख्य अनुष्ठाता के रूप में महाधर्माध्यक्ष ने जल की आशीष दी और पवित्र जल का छिड़काव गिरजाघर परिसर एवं उपस्थित विश्वासियों पर किया। अपने धर्मोपदेश में उन्होंने कहा, “संत वही है जो प्रभु के प्रकाश को अपने जीवन में अपनाए और उसे दूसरों तक पहुंचाने का माध्यम बने। यह गिरजाघर हमारे विश्वास का प्रतीक है, लेकिन वास्तविक गिरजाघर हम सभी विश्वासी हैं।

हमारी एकता, प्रेम और विश्वास ही इस गिरजाघर के भविष्य को स्वर्णिम बनाएंगे।” कार्यक्रम में फादर आनंद डेविड खलखो, फादर मनोज वेंगतनम, फादर अनिम प्रकाश, फादर अगस्तुस सहित अन्य पुरोहितगण, धर्मबहनें और हजारों की संख्या में विश्वासी शामिल हुए।
लालपुर पल्ली का संक्षिप्त इतिहास

रांची महाधर्मप्रांत की सबसे छोटी पल्लियों में से एक लालपुर में वर्तमान में लगभग 400 परिवार और 2300 पंजीकृत विश्वासी हैं। 1992 में फादर लियो मिंज द्वारा औपचारिक घोषणा के बाद पल्लीवासियों ने स्वेच्छा दान और सामूहिक प्रयासों से निर्माण का सपना देखा, जो अब साकार हो गया। पहले होली क्रॉस स्कूल परिसर में मिस्सा और आयोजन होते थे।
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