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चांदी की चमक बनी मुसीबत: एक लाख मजदूरों के रोजगार पर संकट, मथुरा सराफा बाजार में कारोबार ठप

cy520520 6 hour(s) ago views 483
  

चौक बाजार में चांदी की गलाई के कारखाने में पसरा सन्नाटा और ठंडी पड़ी भट्टी। फोटो जागरण



जितेंद्र गुप्ता, जागरण, मथुरा सराफा बाजार उम्मीद और आशंका के बीच झूल रहा है। एक ओर चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल है, तो दूसरी ओर कारोबार का पहिया थम चुका है। व्यापारी डरे हुए हैं। बाजार से ग्राहक दूर हो गए। लेनदेन ठप पड़ा है। चांदी गलाने की भट्ठियां ठंडी पड़ी हैं। सराफा कारोबार से जुड़े एक लाख मजदूरों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। कई मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है।
कारीगर, ढलाई, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों की आजीविका पर असर

चांदी के बढ़ते दामों ने सराफा बाजार में ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसने 40 वर्षों का इतिहास तोड़ दिया। डेढ़ महीने के भीतर चांदी की कीमत दोगुणी होकर ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जिसकी कल्पना भी कारोबारियों ने नहीं की थी। 21 नवंबर को जहां चांदी का भाव एक लाख 52 हजार रुपये प्रति किलोग्राम था, 20 जनवरी तक तीन लाख 22 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा। यह उछाल सराफा उद्योग के लिए झटका है। अब बाजार में न खरीदार हैं, न विक्रेता।
एक महीने से ठंडी पड़ी भट्ठियां, उम्मीद व आशंका के बीच फंसा सराफा उद्योग

हालात ऐसे हो गए हैं कि दुकानें खुली तो हैं, लेकिन लेनदेन ठप है। इसी उथल-पुथल के बीच सराफा कारोबार को बड़ा झटका उस वक्त लगा, जब चार दर्जन व्यापारियों की करीब 2500 किलो चांदी लेकर 10 कारोबारी फरार हो गए। करोड़ों की चांदी डूबने की आशंका ने छोटे और मझोले व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने सराफा कारोबार से जुड़े एक लाख मजदूरों के रोजगार पर भी संकट ला दिया है।

कारीगर, ढलाई करने वाले, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों के लेकर अन्य की आजीविका इसी पर निर्भर है। स्थिति यह है कि एक पायल बनाने में ही करीब 10 से 12 मजदूरों को रोजगार मिलता है। लेकिन जब पायल ही नहीं बनेगी, तो ये मजदूर क्या करेंगे।
चांदी न मिलने पर गिलट की पायल का काम

अर्जुनपुरा के रहने वाले कारीगर अजय बताते हैं कि चांदी की माल नहीं मिलने पर अब उन्होंने गिलट की पायल बनाने का काम शुरू किया है, लेकिन इसमें भी मजदूरी कम हो गई है। फिर भी परिवार के भरण पोषण को देखते हुए गिलट का काम ले लिया है।



एक महीने से सन्नाटा पसरा है। सिर्फ बैठने की तनख्वाह कहां से दें। इसलिए तीन मजदूरों में से दो को हटा दिया है। दाम स्थिर होने के बाद काम आने पर फिर रख लेंगे।
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शंकर लाल, दुकानदार


दुकानदारों से माल लाकर पायल बनाकर उनको देते थे। मजदूरी हमें मिलती थी। 25 दिन से काम नहीं मिल रहा है। दुकानदारों ने उधार रुपये दिए हैं। इससे घर चल रहा है। काम मिलने के बाद कटा देंगे।
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महेश, कारीगर
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