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आवाज से पता चलेगा कि कैसा है मानसिक स्वास्थ्य, यूपी हेल्थ टेक काॅन्क्लेव 1.0 में AI ईको सिस्टम पर चर्चा

cy520520 2026-1-21 07:56:44 views 1037
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सोचिए कि आपको कोई फोन काल करके बातचीत करे, इसी दौरान वह आपसे कहे कि क्या बात है, किसी परेशानी में हो क्या? वैसे तो फोन पर ये स्थिति कभी-कभी ही होती है, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) अब आवाज से आपकी मनोस्थिति का पता लगा सकता है। आइआइटी कानपुर, साफ्टवेयर टेक्नोलाजी पार्क्स आफ इंडिया लखनऊ (एसटीपीआइ) और जिम्स नोएडा के सहयोग से विकसित किए गए एआई टूल \“मनोदयम\“ ने इसे संभव बना दिया है।

यूपी हेल्थ टेक कान्क्लेव 1.0 में मंगलवार को मनोदयम विकासकर्ता संजय भारद्वाज ने बताया कि आपकी आवाज सिर्फ बातचीत का जारिया ही नहीं है। अब बोलने के तरीके, टोन, पिच से मानसिक बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है। आज की तनावपूर्ण कार्य प्रणाली में मानसिक तनाव आम बात है।

यही तनाव आपके बात करने में झलकता है, लेकिन एआई से सामान्य बातचीत का आकलन करके प्रारंभिक अवस्था में यह बताना संभव हो गया है कि कौन सी मानसिक बीमारी से आप जूझ रहे हैं या आपको हो सकती है। स्मार्ट फोन में मनोदयम एआई टूल को डाउनलोड करके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली जा सकती है।  

संजय ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार लगातार कार्य कर रही है। ग्रामीण स्तर तक लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन मानसिक रोग विशेषज्ञों, काउंसलर की कमी से इसमें दिक्कतें आ रही हैं।

अब कोई भी स्वास्थ्य कर्मी कुछ सवाल पूछकर इस एआई टूल पर जवाब को रिकार्ड करके, मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी दे सकता है। इसमें प्रति व्यक्ति खर्च भी लगभग एक रुपये आएगा। उन्होंने ने बताया कि यूपी एक बड़े चिकित्सा संस्थान से मनोदयम को लेकर बातचीत हुई है।  

इमेजेक्सएआई तैयार करेगा एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई की रिपोर्ट

एआई ने चिकित्सा उपकरणों, बीमारी का पता लगाने के तरीकों और इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। इसका फायदा चिकित्सकों से लेकर मरीजों तक हो रहा है। इमेजेक्सएआई एक ऐसा ही टूल है, जिससे एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई की रिपोर्ट को तैयार करने के लिए रेडियोलाजिस्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई मशीन में साफ्टवेयर के इस्तेमाल से रिपोर्ट तैयार किया जा सकेगा।

इमेजेक्सएआई की सह संस्थापक नूर फातिमा ने बताया कि जिम्स नोएडा से सहायता प्राप्त इस टूल के इस्तेमाल से कम समय में रिपोर्ट तैयार करना संभव हो गया है। रेडियोलाजिस्ट की कमी के कारण मरीजों को रिपोर्ट के लिए 24 से 72 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। उनके इस टूल से ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में टेक्नीशियन की मदद से ही एक्सरे रिपोर्ट तैयार हो सकती है। जिससे डाक्टर उसका इलाज तुरंत शुरू कर सकते हैं।
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