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700 करोड़ का बेहिसाब लेनलेदन... भाेले बाबा ग्रुप और लिंक कारोबारियों के यहां 131 घंटे तक चली आयकर की सर्च

deltin33 2026-1-21 07:26:43 views 785
  

आयकर विभाग के अफसरों की की गाड़ी। फाइल



जागरण संवाददाता, आगरा। आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा को भोले बाबा ग्रुप और उससे लिंक कारोबारियों के यहां सर्च में बड़ी सफलता हाथ लगी है। करीब 131 घंटे तक चली कार्रवाई में विभाग को 600-700 करोड़ रुपये का बेहिसाब लेनदेन मिला है। अघोषित विदेशी निवेश और अघोषित खर्च के साक्ष्य भी अधिकारियों के हाथ लगे हैं।

उधर, मिलावटखोरी की आशंका में दाऊजी मिल्क फूड प्राइवेट लिमिटेड, दौसा के यहां लिए गए सैंपल जांच में अधोमानक पाए गए हैं। इसे टैक्स चोरी के साथ मिलावट के खेल के पर्दाफाश पर अब तक की पहली कार्रवाई माना जा रहा है।
गुरुवार को जांच की थी शुरू

आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा ने 15 जनवरी गुरुवार की सुबह सात बजे डेरी उत्पाद कंपनियों के 11 शहरों में स्थित 35 ठिकानों पर एक साथ जांच शुरू की थी। छठवें दिन मंगलवार शाम छह बजे सर्च पूरी हुई। आयकर विभाग ने भोले बाबा मिल्क फूड इंडस्ट्रीज लिमिटेड और भोलेबाबा मिल्क फूड इंडस्ट्रीज (धौलपुर) प्राइवेट लिमिटेड के यहां सर्च की थी।

यह ग्रुप कृष्ण मुरारी अग्रवाल व उनके बेटे गोविंद अग्रवाल व तरुण अग्रवाल तथा हरिशंकर अग्रवाल व उनके बेटे जितेंद्र अग्रवाल व वीरेंद्र अग्रवाल का है। इसके साथ ही आयकर की टीमें बीकानेर के आशीष अग्रवाल ग्रुप और जोधपुर के मलानी ग्रुप के यहां भी पहुंची थीं।
यहां पर लिए गए थे सैंपल

इसके अलावा सर्च में शामिल कमला नगर निवासी गौरव बंसल की दाऊजी मिल्क फूड प्राइवेट लिमिटेड (आगरा-भरतपुर के दाऊजी ग्रुप) की दौसा स्थित फैक्ट्री और सिरसागंज के अभिषेक और नमन जैन के पोद्दार मिल्क प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (पोद्दार ग्रुप), सिरसागंज में मिलावटखोरी की आशंका में दुग्ध उत्पादों के सैंपल लिए गए थे। नई दिल्ली स्थित खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में दाऊजी मिल्क फूड प्रा.लि. के नमूने अधोमानक पाए गए हैं।
600-700 करोड़ रुपये का बेहिसाब लेनदेन की जानकारी

आयकर सूत्रों के अनुसार, करापवंचन (कर चोरी) के मामले में भोले बाबा ग्रुप, मलानी ग्रुप व आशीष अग्रवाल के यहां 600-700 करोड़ रुपये का बेहिसाब लेनदेन, बिना रिकॉर्ड की गई खरीद-बिक्री, हुंडी लेनदेन, अघोषित विदेशी निवेश, अघोषित खर्च के प्रमाण मिले हैं। कागजों पर खरीद-बिक्री दिखाई गई, लेकिन माल की आपूर्ति नहीं की गई है। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का लाभ पाने को फर्जीवाड़ा किया गया।

अब आयकर विभाग साक्ष्यों की जांच कर बचाई गई आय और कर का निर्धारण करेगा। डेरी प्रोडक्ट बनाने वालों के यहां मिली सैकड़ों करोड़ रुपये की कर चोरी की विभाग अग्रेतर जांच कर रहा है। इसके लिए उनके यहां से मिले लेनदेन के रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं।

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